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वॉटर रिसाइक्लिंग की अनोखी मिसाल, जानिए पानी के मामले में कैसे आत्मनिर्भर बना ये ऑफिस

पानी बचाना और पानी का सही इस्तेमाल अब पूरी दुनिया के लिए चुनौती बन चुका है।
अपडेटेड Nov 18, 2019 पर 09:42  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पानी बचाना और पानी का सही इस्तेमाल अब पूरी दुनिया के लिए चुनौती बन चुका है। ऐसे में दिल्ली का सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट एक उदाहरण है। पर्यवारण के क्षेत्र में काम कर रहे इस संस्थान ने अपने तुगलकाबाद ऑफिस को इस तरीके से डिजाइन किया है कि वो पानी के मामले में आत्मनिर्भर है।


सेंटर फॉर साईंस एंड एनवायरमेंट के इस कैंपस में पानी की एक भी बूंद बरबाद नहीं होती । किचन और टॉयलेट का पानी पूरी तरह से ट्रीट कर यहीं इस्तेमाल किया जाता है । किचन से निकलने वाले पानी से तेल जैसे पदार्थों को यहां इस ग्रीस ट्रैप में अलग कर लिया जाता है । इसके बाद जो पानी बचता है उसे अलग अलग बॉक्स में गुरुत्वाकर्षण से धीरे धीरे साफ किया जाता है। माईक्रोब्स भी पानी मे मौजूद pollutants को खाकर उन्हें साफ सकते हैं।


अब पानी 90% साफ है। जो पानी बचता है उसे इन पौधों के नीचे से ले जाया जाता है। पौधे अपनी जरूरत के हिसाब से पानी में से न्यूट्रिएंट लेते हैं और पानी को और साफ करते हैं। इसके बाद पानी में ऑक्सीजन एड करने की प्रक्रिया होती है। इस पूरी प्रक्रिया में खर्च काफी कम है क्योंकि सबकुछ प्राकृतिक तरीके से किया जाता है । बिजली का इस्तेमाल सिर्फ पानी में ऑक्सीजन देने के लिए किया जाता है।


सिर्फ यही नहीं यहां बरसात के पानी को जमा करने की भी व्यवस्था है । करीब 6 लाख लीटर बरसात का पानी रोका जा सकता है जो ग्राउंड वॉटर रिचार्ज के काम आता है। यानी यह कैंपस पानी के लिए आत्मनिर्भर है और अपने आसपास के पर्यावरण को भी बेहतर बना रहा है।


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