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JNU में फीस बढ़ोतरी पर हंगामा, सड़क से संसद तक पहुंचा विवाद

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय JNU के छात्र तीन हफ्ते से ज्यादा वक्त से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
अपडेटेड Nov 20, 2019 पर 12:46  |  स्रोत : Moneycontrol.com

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय JNU के छात्र तीन हफ्ते से ज्यादा वक्त से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की मांग है कि हॉस्टल की फीस में जो बढ़ोतरी की गई, जो और चार्ज लगाए गए हैं उन्हें वापस लिया जाए। साथ ही यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कुछ पाबंदियां भी लगाई हैं, उन्हें भी वो हटाने की मांग कर रहे हैं। पिछले पांच साल से अलग अलग वजह से JNU सुर्खियों में रहा है। ज्यादातर वाकये ऐसे हैं जो JNU को ही कठघरे में खड़ा करते हैं। अब सवाल है कि फीस बढ़ोतरी के मामले में क्या JNU के छात्र अड़ियल रवैया अपना रहे हैं और अपनी मनमानी करना चाहते हैं। या JNU को बदनाम करने की ये साजिश हो रही है  जैसा कि यूनिवर्सिटी के छात्र सरकार पर आरोप लगाते रहे हैं। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के रोल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या उन्होंने मामले को सुलझाने की कोशिश नहीं की। एक रिपोर्ट देखते हैं फिर चर्चा शुरू करते हैं।


JNU में फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्रों के विरोध की गूंज सड़क से लेकर संसद के अंदर तक सुनाई दे रही है। JNU के छात्र फीस बढ़ोतरी के खिलाफ 23 दिन से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। फीस रोलबैक कराने की असफल कोशिशों के बाद छात्रों ने जब अपनी बात जनता के नुमाइंदों तक पहुंचानी चाही तो इन्हें पुलिस की लाठी का सामना करना पड़ा जिसमें करीब 10 छात्र घायल हो गए।


इसके बावजूद JNU के छात्र पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। JNU छात्र संघ ने साफ कर दिया है कि सरकार बढ़ी हुई फीस वापस ले। उसने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है।


JNU एडमिनिस्ट्रेशन के ड्राफ्ट हॉस्टल मैनुअल के मुताबिक डबल रूम का चार्ज 10 रुपए महीना से बढ़ाकर 300 रुपए और सिंगल रूम का चार्ज 20 रुपए से बढ़ाकर 600 रुपए महीना कर दिया गया है। अब छात्रों को हर महीने 1700 रुपए का सर्विस चार्ज भी देना पड़ेगा। इसके अलावा वन टाइम सिक्योरिटी 5,500 रुपए ये बढ़ाकर 12 हजार रुपए कर दी थी जिसे फिलहाल रोलबैक कर लिया है। गरीबी रेखा से नीचे वाले छात्रों को रूम फीस, सर्विस चार्ज, मेस फीस में 50 फीसदी की छूट दी है।


रात को साढ़े 11 बजे के बाद छात्रों के बाहर निकलने पर पाबंदी लगाई गई है। मेस के लिए ड्रेस कोड भी लागू होगा। छात्रों को इन पर भी कड़ा एतराज है। छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद सीपीएम के नेता सीताराम येचुरी को इमरजेंसी के दिन याद आ रहे हैं। सरकार ने छात्रों की मांगों पर विचार करने का भरोसा दिलाया है। बीजेपी के नेता छात्रों के विरोध प्रदर्शन को राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं।


सवाल ये है कि क्या JNU में फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन गैर-वाजिब है? क्या JNU के छात्रों का प्रदर्शन सिर्फ फीस बढ़ोतरी और पाबंदियों को लेकर है या ये उससे ज्यादा है? क्या JNU का छात्र आंदोलन राजनीति से प्रेरित है? क्या JNU को बदनाम करने की साजिश हो रही है और छात्र उसी का प्रतिकार कर रहे हैं?


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