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तमाम चिंताओं के बावजूद निवेशकों में बना हुआ है अमेरिकी बाजारों का आकर्षण, क्या हो आपकी रणनीति

ऐसे निवेशक जो किसी नियर टर्म में उतार-चढ़ाव को पचाने की क्षमता रखते हैं उनके लिए अमेरिकी बाजार मे् कमाई के अच्छे मौके नजर आ रहे हैं.
अपडेटेड Jun 23, 2021 पर 20:40  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कोरोना वैक्सीनेशन में तेजी इकोनॉमी के फिर से खुलने से जोश में आए सेंटीमेंट जैसे कारणों के चलते साल 2021 की पहली तिमाही में अमेरिकी कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। यहां तक कि बाजार ने US फेड की तरफ से बढ़ती महंगाई और दरों में बढ़ोतरी के संकेत को भी पचा लिया है।


बाजार जानकारों का कहना है कि अमेरिकी बाजार के फंडामेंटल काफी मजबूत नजर आ रहे हैं और ऐसे निवेशक जो किसी नियर टर्म में उतार-चढ़ाव को पचाने की क्षमता रखते हैं उनके लिए अमेरिकी बाजार मे् कमाई के अच्छे मौके नजर आ रहे हैं। इसके अलावा दुनिया की सबसे बड़े इकोनॉमी में निवेश के अपने अलग ही फायदे होते हैं। अमेरिका में निवेश हमें भौगोलिक विविधता, विनिमय दर में आने वाले उतार-चढ़ाव और दुनिया के कुछ सबसे बड़े ब्रैंड में निवेश का मौका देता है।


वित्त वर्ष 2020 में  टेक फर्मा और हेल्थ केयर स्टॉक्स में जोरदार बढ़ोतरी देखने को मिली। इसकी वजह ये रही है कि कोविड माहामरी काल में लोगों का रूख ग्रोथ और डिफेंसिव सेक्टर की तरफ हो गया। उम्मीद है कि अमेरिकी बाजार में ये ट्रेंड आगे भी कायम रहेगा।


अमेरिका ने जो बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन साल 2021 की दूसरी छमाही में एक 1.8 ट्रिलियन डॉलर का राहत पैकेज लेकर आ सकती है। इसके अलावा अमेरिकी सरकार इन्फ्रा सेक्टर में बड़ा निवेश करने की तैयारी में है। जिससे आगे हमें कैपिटल गुड्स, मैटेरियल, real estate और logistics सेक्टर मे अच्छी ग्रोथ देखने को मिल सकती है।


दुनिया का टेक कैपिटल होने के कारण  अमेरिका cloud, artificial intelligence, machine learning, internet of things, 5G और robotics का हब है। टेक्नोलॉजी में अमेरिका के प्रभुत्व का असर ये है कि पिछले सालों के दौरान S&P 500 इंडेक्स में टेक्नोलॉजी सेक्टर का वेटेज लगातार बढ़ता दिख रहा है। उम्मीद है कि आगे हमें टेक शेयरों में परंपरागत इकोनॉमी से जुड़े शेयरों की तुलना में ज्यादा ग्रोथ देखने को मिलेगी। जिसको देखते हुए S&P 500 इंडेक्स लंबे समय तक वेल्थ मल्टीप्लायर बना रहेगा।


अमेरिका में निवेश से जुड़ी चिंताएं


अमेरिका में इस समय सबसे बड़ी चिंता महंगाई को लेकर है। यूएस डॉलर की कमजोरी के चलते देश में इंपोर्ट महंगा हो गया है जिसका असर बढ़ती महंगाई के रुप में देखने को मिल रहा है। अगर महंगाई ऊंची  दर पर बनी रहती है  और रोजगार के मोर्चे पर सुधार दिखता है तो  यूएस फेड को अपनी दरें बढ़ानी पड़ेंगी जिससे यूएस इक्विटी मार्केट में बड़ा करेक्शन आ सकता है। क्योंकि ऐसा होने पर संस्थागत निवेशक इक्विटी में बिकवाली करके बेटर यील्ड के लिए डेट (बॉन्ड) में निवेश करना शुरु कर देंगे।


अमेरिका में प्रस्तावित राहत पैकेज के साथ ही वित्तीय घाटे  में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। जिसके चलते यूएस डॉलर पर और दबाव बढ़ेगा। ऐसी स्थिति में वित्तीय घाटे को घटाने के लिए अगर बाइडन प्रशासन की तरफ से करों में बढ़ोतरी की जाती है तो इससे लोगों की कमाई और अंतत: बाजार पर असर देखने को मिलेगा।


इसके साथ ही अमेरिका-चाइना ट्रेड वार का असर अमेरिकी कंपनियों पर देखने को मिल सकता है। यह असर चाइनीज कंपनियों की तुलना में अमेरिकन कंपनियों पर ज्यादा होगा। इसमें भी वह कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी जो एक्सपोर्ट और इंपोर्ट पर निर्भर हैं।


नियर टर्म में बाजार की नजरें अगली FOMC मीटिंग में  यूएस फेड के कमेंट्री पर होगी। हमारा विश्वास है कि महंगाई को लेकर यूएस फेड ज्यादा उदार होगा और तब तक उसकी नीतियों में नरमी बनी रहेगी जब तक बेरोजगारी के मोर्चे पर बड़ा सुधार नहीं होता।


क्या हो हमारी रणनीति


अमेरिका के इकोनॉमी और अर्निंग फंडामेंटल लगातार सुधर रहे हैं लेकिन अमेरिकी इक्विटीज को लेकर सिर्फ एक बड़ी समस्या है वह है उनका महंगा वैल्य़ूएशन। ऐसे लोग जो यूएस मार्केट में निवेश करना चाहते हैं उनके  लिए सिफारिश है कि वह गिरावट पर खरीद की रणनीति अपनाए। हालांकि लंबी अवधि के निवेशक शॉर्ट टर्म के उतार-चढ़ाव के दरकिनार रखते हुए अपनी एसआईपी जारी रख सकते है। जिस भी दिन बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिले अपनी चालू एसआईपी में एकमुश्त निवेश करें।



 


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