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वाधवान बंधुओं की जमानत नामंजूर, न्यायिक हिरासत में भेजे गये

अधिकारियों ने कहा कि सीबीआई की FIR में कथित तौर पर वाधवन भाइयों को कपूर और अन्य द्वारा पैसे की अदला-बदली के लिए आरोपी बनाया गया है।
अपडेटेड May 11, 2020 पर 16:02  |  स्रोत : Moneycontrol.com

रविवार को एक विशेष अदालत ने यस बैंक घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किये गये डीएचएफएल के प्रोमोटर कपिल वाधवन और उनके भाई धीरज द्वारा दायर अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।


वाधवान भाइयों की सीबीआई हिरासत रविवार को समाप्त हो गई थी, इसलिए उन्हें अदालत के सामने पेश किया गया था और अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।


अदालत में, उन्होंने कोरोनोवायरस प्रकोप का हवाला देते हुए अस्थायी जमानत के लिए आवेदन किया था। उन्होंने यह तर्क दिया था कि कोरोना से संक्रमित होने का यह जोखिम जेल के कैदियों को भी है इसलिए जमानत दी जाये। हालांकि, अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी।


वाधवान के वकील ने तर्क दिया कि उनके स्वास्थ्य की समस्याओं के कारण वे कोरोनवायरस के संक्रमण में आने लिए अतिसंवेदनशील हैं।


अखबार में खबर आई थी कि आर्थर रोड जेल में कोरोनोवायरस पॉजिटिव केस पाये गये हैं और तलोजा जेल ने कहा है कि वे परीक्षण करने के बाद ही आरोपी को अंदर लेंगे। इसलिए उनके वकील ने कोर्ट से अपील की थी कि उन्हें कुछ समय के लिए जमानत मिल जाना उनके हित में होगा।


वकील ने कहा कि स्वास्थ्य का अधिकार भी जीवन का आधारभूत अधिकार है जिसके लिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए परंतु अदालत ने उनकी दलीलों को नामंजूर करते हुए वाधवान बंधुओं को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।


दोनों को पिछले महीने महाबलेश्वर स्थित एक क्वारंटाइन केंद्र से गिरफ्तार किया गया था, जब लगभग 50 दिन बाद सीबीआई ने कथित रिश्वत के एक मामले में भी उन्हें आरीपी बनाया था जिसमें यस बैंक के पूर्व सीईओ राणा कपूर शामिल थे।


अधिकारियों ने कहा कि सीबीआई की प्राथमिकी में कथित तौर पर वाधवन भाइयों को कपूर और अन्य द्वारा पैसे की अदला-बदली के लिए आरोपी बनाया गया है।


एजेंसी ने आरोप लगाया है कि 62 वर्षीय कपूर ने वाधवान बंधुओं के साथ मिलकर यस बैंक के माध्यम से डीएचएफएल को वित्तीय सहायता देने के लिए एक आपराधिक साजिश रची और इसके बदले में अपने और अपने परिवार के सदस्यों की कंपनियों को पर्याप्त अनुचित लाभ पहुंचाया।


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