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प्रधानमंत्री के गोद लिए गांव जयापुर का क्या है हाल

प्रकाशित Mon, 13, 2019 पर 16:25  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

प्रधानमंत्री के गोद लेने के बाद गांवों के लोगों को अपने ही गांव में रोजगार मिलने लगा है। हालांकि गांव के बुनकरों के लिए अभी भी चुनौती बनी हुई है। सीएनबीसी आवाज की चुनाव यात्रा पहुंची वाराणसी प्रधानमंत्री के आदर्श सांसद ग्राम जयापुर और नागेपुर।


सीएनबीसी-आवाज़ की टीम आ पहुंची हैं वाराणसी के गांव जयापुर। आज से 4 साल पहले सीएनबीसी- आवाज़ की टीम जब इस गांव में पहुंची थी जब प्रधानमंत्री ने इस गांव को गोद लिया था। तब यहां विकास के कई काम शुरू हुए थे। आज सीएनबीसी- आवाज़ की टीम उन सभी विकास कार्यों का जायजा लेंगी।


गांव में प्रवेश करते ही डाकघर पर नजर पड़ी जो पहले नहीं था। डाकघर औऱ विद्यालय के चारदिवारी के रंगीन दीवारे इस बात की गवाही दे रही थी कि वो हाल ही में बने हैं। आवाज़ की टीम जब आगे बढ़ी तो दो-दो बैंक दिखे। गांव को अंधेरे से मुक्ति के लिए सोलर प्लांट लग गए हैं। गांव में थोड़ा और अंदर जाने पर टीम की नजर पड़ी हथकरघा केंद्र पर जो यहां पहले नहीं थी।


फिर आवाज़ की टीम निकल पड़े मोदी नगर की तरफ। जहां दलितों के लिए घर बनाए जा रहे थे। इन कच्ची सड़कों को देखकर तो ऐसा लगा कि शायद अभी तक कॉलोनी तैयार नहीं हुई होगी लेकिन वहां पहुंचने के बाद पता चला कि कॉलोनी तो दुरुस्त है लेकिन लोग खराब सड़क से परेशान है।
 
आवाज़ टीम ने जब इस समस्या के प्रधान के सामने रखा तो ये बात भी पता चली कि प्रधानमंत्री ने 2 साल पहले पास के ही एक और गांव नागेपुर को गोद लिया है। जब वहां पहुंचा तो पता चला कि इस गांव में पहले घर घर बुनकर पाए जाते थे जो बनारसी साड़ी तैयार करते थे। लोगों को उम्मीद थी कि बुनकरों के लिए करोड़ों रुपए का पैकेज देने वाली मोदी सरकार इस गांव के बुनकर उद्योग को फिर से जीवित करेगी लेकिन अभी तक तो उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा है।


इसी तरह स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 8 से 9 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। हां, तत्काल राहत के लिए समय समय पर एंबुलेंस जरूर आ जाती है। बैंकिंग सुविधाएं भी बहाल हो गईं। गांव में वैसे तो इतनी सुविधाएं भी कहां मिलती हैं चूंकि प्रधानमंत्री ने इस गांव को गोद लिया है इसलिए लोगों की अपेक्षाएं भी ज्यादा हैं।