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फिर पानी-पानी हुई मुंबई, बारिश लड़ने में आखिर क्यों है नाकाम!

मुंबई में पानी, फिर वही कहानी। जब-जब मुंबई में बारिश होती है तो मुंबईकर की जान आफत में पड़ जाती है।
अपडेटेड Sep 05, 2019 पर 10:45  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मुंबई में पानी, फिर वही कहानी। जब-जब मुंबई में बारिश होती है तो मुंबईकर की जान आफत में पड़ जाती है। सड़कें नदियां बन जाती हैं। रेल ट्रैक से लेकर रोड तक कहीं भी आना-जाना आसान नहीं रह जाता। आखिर बारिश में मुंबई पानी पानी क्यों हो जाता है। देश की आर्थिक राजधानी, सबसे अमीर म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन और सियासत दानों के तमाम दावे धरे रह जाते हैं। आखिर क्यों डूबती है मुंबई, हर बार पानी में वही कहानी। क्या किसी को फिक्र नहीं है। एक दिन मुंबई काम करना बंद कर देती है तो करोड़ों का नुकसान हो जाता है तो आखिर हम क्यों नहीं हो पाते हैं इससे लड़ने के लिए तैयार। क्या क्लाइमेट चेंज का असर है या फिर विकास की आंधी में पेड़ों की अंधाधुध कटाई और खराब ड्रेनेज सिस्टम। आज इस पर इस खास शो में चर्चा होगी। इस चर्चा में साथ दे रहे हैं। IMD के मौसम वैज्ञानिक डी एस पई। साथ ही फोन पर जुड रही हैं बीजेपी प्रवक्ता शाइना एनसी।


मुसीबत की बारिश


पिछले 36 घंटे में मुंबई में रेकॉर्ड 500 मिमी बारिश दर्ज की गई है। सभी 3 लाइनों पर लोकट ट्रेन भी ठप्प हो गई है। बेस्ट की बस सेवाएं भी बुरी तरह से प्रभावित हैं।
मुंबई के कई इलाकों में पानी भर गया है। समुद्र में हाईटाइड होने से हालात और खराब हो गए हैं। मुंबई में आज के लिए रेड अलर्ट हैं। वहीं, कल के लिए ऑरेंज अलर्ट है।


क्यों डूबती है मुंबई


इसकी सबसे बड़ी वजहों में से है पुराना ड्रेनेज सिस्टम, उत्तरी मुंबई में बेतरतीब विकास, क्लाइमेट चेंज से परेशानी, मैंग्रूव इकोसिस्टम की तबाही, प्रदूषण और बढ़ती आबादी। मुंबई में जो ड्रेनेज सिस्टम यानी व्यर्थ पानी निकासी का जो इंतज़ाम है, वो 20वीं सदी की शुरूआत में बना था और तबसे इसमें कोई बड़ा सुधार काम नहीं हुआ है। समय समय पर इसकी सफाई और दुरुस्तीकरण ही प्रशासन के लिए चुनौती बना रहा है। 2005 में जब मुंबई में बाढ़ के हालात बने थे तब भी यही सिस्टम विलेन साबित हुआ था। जानकारी के मुताबिक इस सिस्टम की क्षमता करीब 25 मिलीमीटर पानी प्रति घंटे निकालने की है जबकि भारी बारिश के समय ज़रूरत 993 मिलीमीटर प्रतिघंटे तक की हो जाती है। इसका अंजाम ये होता है कि जगह जगह पानी भर जाता है।


मुंबई में जल्दी जल्दी बाढ़ जैसे हालात बनने का दूसरा सबसे बड़ा कारण है उत्तरी मुंबई यानी बांद्रा और कुर्ला के आसपास के बड़े इलाकों में बेतरतीब विकास किया जाना। बताया जाता है कि यहां बड़े-बड़े भवन बगैर उचित ड्रेनेज सिस्टम के बना दिए गए। बगैर सोची समझी प्लानिंग के हुए इस विकास के कारण यहां कई जगह पानी निकासी इंतज़ाम चोक हो जाते हैं। ये भी एक तथ्य है कि 1990 के दशक में ही भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय को सूचित कर दिया गया था कि बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स को मंज़ूरी दिए जाने से भविष्य में त्रासदियां संभव हैं।


मुंबई में आफत की बारिश के पीछे क्लाइमेट चेंज के कारण मानसून के बदले तेवरों को भी कारण माना जा रहा है। 2017 में भी इस ​तरह की रिपोर्ट आई थी और ताज़ा हालात को लेकर भी मुंबई नगरपालिका के प्रमुख प्रवीण परदेशी ने भी यही थ्योरी दी है। एक स्टडी के हवाले से कहा जा चुका है कि क्लाइमेट चेंज के कारण अरब सागर से नमी भरी हवाओं का चलन बदला है जिनके कारण मध्य भारत में भारी बारिश होने लगी है।


मैंग्रूव इकोसिस्टम की तबाही


न्यूज़18 ने कुछ ही रोज़ पहले इस वनस्पति से बनने वाले सुरक्षा कवच के बारे में आपको बताया था। मुंबई में भी बाढ़ जैसे हालात बनने के पीछे यह प्रमुख कारण माना जा रहा है कि यहां मैंग्रूव इकोसिस्टम को भारी नुकसान पहुंचाया गया है।


भारत की व्यापारिक राजधानी के नाम से मशहूर मुंबई में लगातार बढ़ती आबादी से पूरे सिस्टम पर दबाव बढ़ा है, इसमें दोराय नहीं है। कई तरह के सुधार कार्यों के न हो पाने की वजह भी यही दबाव रहा है। दूसरी ओर प्रदूषण को लेकर जनसामान्य में जागरूकता नहीं है। सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरों की भरमार है जिसमें नाले, नालियां और गलियां प्लास्टिक कचरे से पटी पड़ी हैं। भारी बारिश के समय यही कचरा ड्रेनेज सिस्टम को जाम करता है और पानी भर जाने की समस्या में इज़ाफा करता है।


इन तमाम कारणों के हवाले से ये आशंका भी जताई जाने लगी है कि अब मुंबई में अगर युद्धस्तर पर ड्रेनेज को लेकर काम नहीं हुआ तो हर साल बारिश के मौसम में मुसीबत खड़ी होगी और मुंबई के सामने समस्या और विकराल होती जाएगी। जागरूक बनें, नागरिक के तौर पर जो ज़िम्मेदारी आपकी है उसे ज़रूर निभाएं।


 


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