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मार्केट ने रिस्क दिखने के बावजूद बनाया रिकॉर्ड हाई, क्या तेजी रह सकेगी बरकरार?

मार्केट में तेजी का बड़ा कारण कोरोना की दूसरी लहर से इकोनॉमी और बिजनेस को अधिक नुकसान न होने का अनुमान है। लिक्विडिटी की कमी न होने से भी मार्केट में तेजी आ रही है।
अपडेटेड Jun 01, 2021 पर 16:45  |  स्रोत : Moneycontrol.com

इक्विटी बेंचमार्क Nifty ने 31 मई को इंट्राडे ट्रेड में 15,605.35 पॉइंट का नया हाई लेवल छुआ था और यह लगभग एक प्रतिशत बढ़कर 15,582.80 पॉइंट पर बंद हुआ था। इसमें लगातार सातवें ट्रेडिंग सेशन में तेजी रही थी। कैलेंडर ईयर 2021 में निफ्टी में 11 प्रतिशत और सेंसेक्स में 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कोरोना की दूसरी लहर से बिजनेस और इकोनॉमी को नुकसान होने के बावजूद मार्केट चढ़ा है।


HDFC Securities के हेड (रिटेल रिसर्च), दीपक जसनानी ने कहा कि लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैपिलाइजेशन में अगली लाख करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी के लिए कई बड़े IPO की लिस्टिंग और लार्ज और मिडकैप शेयर्स में तेजी जारी रहने की जरूरत होगी।


उन्होंने बताया, "BSE का साइज बढ़ने पर अगले एक लाख करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी जल्द हो सकती है। हालांकि, इसके लिए मार्केट ट्रेंड में बड़ी रुकावट नहीं आनी चाहिए।"


जसनानी ने कहा कि फाइनेंशियल, IT, ऑयल एंड गैस, लॉजिस्टिक्स, FMCG और फार्मा सहित बड़े मार्केट कैप वाले सेक्टर्स को इस बढ़ोतरी के होने तक अच्छा प्रदर्शन करना होगा। इसके साथ ही इंटरनेट से जुड़े बिजनेस (मौजूदा और नई लिस्टिंग्स) में भी तेजी की जरूरत होगी।


मार्केट को कहां से मिल रही ताकत?


कोरोना की दूसरी लहर के कारण हो रहे नुकसान के बावजूद कुछ कारणों ने मार्केट को अभी तक के हाई लेवल पर पहुंचाया है। तेजी का एक बड़ा कारण यह उम्मीद है कि जनसंख्या के एक बड़े हिस्से को वैक्सीन लग जाएगी और कोरोना का खतरा बहुत कम हो जाएगा।


इसके साथ ही दुनिया के बड़े सेंट्रल बैंकों ने यह आश्वासन दिया है कि मार्केट में लिक्विडिटी की कमी नहीं होगी और ग्रोथ को मदद देने के लिए रेट्स को कम रखा जाएगा। इससे भी मार्केट में तेजी आ रही है।


कोरोना के घटते मामलों और चौथे क्वार्टर में अधिकतर कंपनियों के रिजल्ट अनुमान के अनुसार रहने से भी सेंटिमेंट मजबूत हुआ है।


एंबिट एसेट मैनेजमेंट के फंड मैनेजर, मनीष जैन ने कहा कि पहली लहर के विपरीत राज्य सरकारों ने लॉकडाउन को लेकर सतर्कता से फैसला किया और इससे लॉजिस्टिक्स और प्रोडक्शन पर बड़ा असर नहीं पड़ा। इससे इकोनॉमी और ग्रोथ पर कुल असर सीमित होगा।


हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि मार्केट में करेक्शन होना है और यह कब और कितना होगा इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता।


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