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Corporate Tax rate cut के बाद बोले पीयूष गोयल, US को देंगे टक्कर, इकोनॉमी को मिलेगी किक

गोयल ने फैसले की घोषणा के बाद उम्मीद जताई है कि सरकार की ओर से दी गई राहत से अर्थव्यवस्था को जरूरी तेजी मिलेगी
अपडेटेड Sep 21, 2019 पर 17:12  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कॉरपोरेट टैक्स में रेट कट होने के बाद मार्केट बाउंस बैक कर गया है। इन्वेस्टर्स को सात लाख करोड़ का मुनाफा हुआ है। 10 सालों का ये सबसे बड़ा सिंगल डे गेन रहा है। इसे इकोनॉमी स्लोडाउन के लिए लिया गया अब तक के सबसे बड़े रिफॉर्म के तौर पर लिया जा रहा है।


कॉमर्स व इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने शुक्रवार को इस फैसले की घोषणा के बाद उम्मीद जताई है कि सरकार की ओर से दी गई राहत से अर्थव्यवस्था को जरूरी तेजी मिलेगी।


गोयल ने कहा कि इन उपायों से देश की टैक्स रेट की तुलना अमेरिका और दक्षिण एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के रेट से की जा सकती है। उन्होंने कहा कि ये उपाय निवेश को बढ़ाने में मदद करेंगे।


सरकार ने नरम पड़ती अर्थव्यवस्था को गति देने और निवेश व रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए शुक्रवार को कई उपायों की घोषणा की। इनमें कॉरपोरेट टैक्स की दरें करीब 10 प्रतिशत कम करके 25.17 प्रतिशत करना, एफपीआई की तरफ से सिक्योरिटी सहित किसी भी डेरिवेटिव की बिक्री से हुए कैपिटल गेन बढ़ा हुआ सरचार्ज नहीं लेना और सीएसआर का दायरा बढ़ाना आदि शामिल हैं।


बता दें कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में गिरकर छह साल के निचले स्तर पांच प्रतिशत पर आ गई है। यह पाकिस्तान की 5.4 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर से भी कम है।


इन घोषणाओं से सरकारी खजाने पर इस साल 1,45,000 करोड़ रुपए का बोझ आएगा।


गोयल ने इंडो अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि कुछ बेहतरीन घोषणाएं की गई हैं अर्थव्यवस्था को जरूरी तेजी देने के लिए, जिसका हम सब लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।


उन्होंने कहा कि अगर छूट को शामिल कर लिया जाए तो हमारी टैक्स दरें प्रतिस्पर्धी हैं और अमेरिका और दक्षिण एशियाई देशों से इनकी तुलना की जा सकती है। गोयल ने कहा कि अमेरिका में कॉरपोरेट टैक्स की दरें 21-22 प्रतिशत है। गोयल ने कहा कि अगर छूट शामिल किया जाए तो हमारी टैक्स दरें 15 प्रतिशत पर आ गई हैं। उन्होंने कहा कि इन उपायों से निवेश को बढ़ावा मिलेगा।


गोयल ने कहा कि राजस्व पर पड़ने वाले 1.45 लाख करोड़ रुपए के इस बोझ से कंपनियों और लोगों को लाभ होगा और इसका इस्तेमाल निवेश के लिए किया जा सकता है, जो कि सुस्त पड़ती आर्थिक वृद्धि को गति देने में मदद करेगा।


वर्तमान में निजी पूंजीगत निवेश सबसे कम है और सरकार ने विनिर्माण क्षेत्र में नया निवेश आकर्षित करने के लिए नया प्रावधान किया है। इससे एक अक्टूबर 2019 या इसके बाद गठित किसी भी कंपनी को विनिर्माण में निवेश करने पर 15 प्रतिशत की दर से इनकम टैक्स भरने का विकल्प मिलेगा।


घोषणा के बाद, कॉरपोरेट टैक्स की प्रभावी दर सरचार्ज समेत 25.17 प्रतिशत होगी जबकि न्यूनतम वैकल्पिक टैक्स की दर 3.5 प्रतिशत घटाकर 15 प्रतिशत हो गई है।


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