ICICI Bank Share Price: एलारा सिक्योरिटीज ने ICICI बैंक को अपना टॉप 'हाई-कनविक्शन' स्टॉक चुना है। कंपनी का कहना है कि हाल के समय और कीमत में गिरावट के बाद लार्ज-कैप स्पेस में इसके वैल्यूएशन आकर्षक हो गए हैं।
ICICI Bank Share Price: एलारा सिक्योरिटीज ने ICICI बैंक को अपना टॉप 'हाई-कनविक्शन' स्टॉक चुना है। कंपनी का कहना है कि हाल के समय और कीमत में गिरावट के बाद लार्ज-कैप स्पेस में इसके वैल्यूएशन आकर्षक हो गए हैं।
एलारा सिक्योरिटीज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के रिसर्च हेड, बिनो पाथीपरम्पिल ने बताया कि बैंकिंग सेक्टर में अभी जबरदस्त ग्रोथ की संभावना दिख रही है, साथ ही जोखिम कम हैं और काम करने का तरीका (एग्जीक्यूशन) भी बेहतरीन है। बैंकों के अलावा, उन्होंने कहा कि मौजूदा मार्केट माहौल में लार्ज-कैप लाइफ इंश्योरेंस और पावर यूटिलिटी कंपनियों के शेयर भी काफी अच्छे दिख रहे हैं।
उनका कहना है कि" सभी सेक्टर में से किसी एक का चुनाव करना हो तो मेरा मानना है कि बैंकों का चुनाव सही फैसला होगा। क्योंकि वहां ग्रोथ की अच्छी संभावना है, जोखिम बहुत कम हैं और अब तक काम करने का तरीका बहुत अच्छा रहा है।" यहीं वजह है कि बैंकिग सेक्टर में एलारा सिक्योरिटीज ने ICICI बैंक कंपनी की पहली पसंद बना हुआ है।
ऑटो सेक्टर के लिए वेट-एंड-वॉच' की रखें रणनीति
मार्केट के ओवरऑल आउटलुक पर बात करते हुए बिनो पाथीपरम्पिल ने कहा कि ब्रोकरेज ऑटोमोबाइल सेक्टर को लेकर पॉजिटिव रुख बनाए हुए है क्योंकि बिक्री के आंकड़े आने शुरू हो गए हैं और फोर्स मोटर्स ने पहले ही अच्छे नतीजे दिखाए हैं।
रिसर्च हेड को उम्मीद है कि मौजूदा तिमाही और शायद अगली तिमाही में भी, फेस्टिव सीजन के दौरान ऑटो और आम कंजम्पशन की मांग मजबूत बनी रहेगी। पिछले दो तिमाहियों में जो तेज़ी देखी गई है, उसके निकट भविष्य में भी बने रहने की संभावना है।
हालांकि, कच्चे माल की बढ़ती लागत मुनाफे के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है। भले ही वॉल्यूम ग्रोथ मजबूत बनी रहे, लेकिन कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
एलारा सिक्योरिटीज ने चेतावनी दी है कि ऑटो कंपनियां अगले एक-दो तिमाहियों में लागत में हुई इस बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं, जिससे अंततः मांग कम होने का जोखिम पैदा हो सकता है।
ब्रोकरेज इस सेक्टर को लेकर 'वेट-एंड-वॉच' (इंतज़ार करो और देखो) की नीति अपना रहा है क्योंकि हालात लगातार बदल रहे हैं। भविष्य की मांग और मार्जिन की स्थिरता काफी हद तक बाहरी कारकों पर निर्भर करेगी, जिनमें तेल की कीमतें, जियोपॉलिटिकल जोखिम और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं।
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