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योर मनीः म्यूचुअल फंड में कैसे होगी बचत!

म्युचुअल फंड में निवेश की शुरूआत तो आज की लेकिन करोडपति कल ही बन जाना है।
अपडेटेड Sep 20, 2018 पर 12:39  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

म्युचुअल फंड में निवेश की शुरूआत तो आज की लेकिन करोडपति कल ही बन जाना है। बाजार में गिरावट आई तो एसआईपी बंद कर दी, फंड ने 2-3 महीने परफॉर्म नही किया, तो फंड स्विच कर दिया। ये कुछ ऐसी गलतियां हैं जो अक्सर हम निवेश के वक्त कर जाते हैं, लेकिन जब तक योर मनी आपके साथ हैं, हम हर मोड पर आपको गलत आर्थिक निर्णय लेने से बचाते रहेंगें और इसमें हमारा साथ देने के लिए मौजूद हैं Paisabazaar.com को-फाउंडर नवीन कुकरेजा।


डायरेक्ट प्लान VS रेगुलर प्लान पर बात करते हुए नवीन कुकरेजा का कहना है कि डायरेक्ट प्लान अक्सर म्युचुअल फंड हाउस वेबसाइट से लेते हैं जबकि रेगुलर प्लान एडवाइजर, ब्रोकर या डिस्ट्रीब्यूटर से लेते हैं। डायरेक्ट प्लान का एनएवी रेगुलर के मुकाबले ज्यादा होता है। दोनों स्कीम का निवेश एक समान होता है। उन्होंने आगे कहा कि रेगुलर प्लान, फंड हाउस डिस्ट्रीब्यूटर को कमीशन देता है। एक्सपेंस रेश्यो के तौर पर निवेशक से खर्च की वसूली की जाती है। रेगुलर प्लान का एक्सपेंस रेश्यो ज्यादा होता है।  बाजार की जानकारी कम होने पर रेगुलर प्लान लें। ब्रोकर या एडवाइजर से फंड लेने पर बेहतर सलाह होगी।


वहीं डिस्ट्रीब्यूटर ना होने से डायरेक्ट प्लान प्लान में खर्च कम होता है। इसका एक्सपेंस रेश्यो रेगुलर के मुकाबले कम होता है। रेगुलर प्लान की तुलना में बेहतर रिटर्न मिलता है। सालाना रिटर्न 0.5 फीसदी -1.5 फीसदी तक ज्यादा होता है। डायरेक्ट प्लान में सीधे एएमसी के जरिए निवेश किया जाता है। बाजार की समझ होने पर डायरेक्ट प्लान लें। निवेशक को खुद रिसर्च कर फंड चुनने होते हैं। ऑनलाइन खरीदा हर फंड डायरेक्ट प्लान नहीं होता है। ऑनलाइन पोर्टल डायरेक्ट प्लान पर चार्ज लेते हैं। कई ऑनलाइन पोर्टल रेगुलर प्लान भी देते हैं। एएमसी वेबसाइट से डायरेक्ट प्लान लें।


सवालः सेबी ने की एक्सपेंस रेश्यो पर लिमिट तय की है।इसका निवेशकों पर कैसे असर होगा? रेगुलर और डायरेक्ट प्लान में निवेश जारी रखना सहीं है?


नवीन कुकरेजाः सेबी ने म्यूचुअल फंड में फीस की सीमा तय की है। म्यूचुअल फंड का एक्सपेंस रेश्यो अधिकतम 2 फीसदी और इंडेक्स फंड, ईटीएफ का एक्सपेंस रेश्यो 1 फीसदी से ज्यादा नहीं है। म्यूचुअल फंड में निवेश सस्ता होगा। डायरेक्ट प्लान में रेगुलर प्लान से कम एक्सपेंस रेश्यो होता है। डायरेक्ट प्लान में डिस्ट्रिब्यूशन खर्च नहीं होता और  डायरेक्ट प्लान में रिटर्न अक्सर रेगुलर प्लान से बेहतर होता है। एयूएम ज्यादा होने पर भी एक्सपेंस रेश्यो घटता है।