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योर मनी: कब करें फंड से ब्रेक-अप, जानें मूल मंत्र

फिरोज अजीज का कहना है कि लक्ष्य पूरा होने के बाद फंड से निकलना सही होता है।
अपडेटेड Mar 19, 2018 पर 19:08  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

योर मनी का मकसद है आपके पैसे की हिफाजत करना, सही वक्त पर सही निवेश की रणनीति अपनाना और आपके मुनाफे का ख्याल रखना। लेकिन इस सबके बीच में थोड़ी सी जल्दबाजी भी भारी पड़ सकती है, आज हम आपको बताएंगे कि किसी भी फंड से निकलने से पहले कौन कौन सी बातें और सावधानियां आपको बरतनी है और इसमें सीएनबीसी-आवाज़ का साथ देंगे आनंद राठी वेल्थ मैनेजमेंट के फिरोज अजीज।


फंड से निकलने का सही वक्त क्या है? इस सवाल के जवाब में फिरोज अजीज का कहना है कि लक्ष्य पूरा होने के बाद फंड से निकलना सही होता है। इक्विटी फंड में लक्ष्य करीब होने पर कुछ साल पहले निकल सकते हैं। अगर लगातार बेंचमार्क से कम रिटर्न मिला तो भी निकल सकते हैं। इसके लिए बेंचमार्क के साथ कैटैगरी के बाकी फंड्स से तुलना करें। फंड के अंडरपरफॉर्मेंस की वजह पर गौर करें, वजह संतोषजनक ना होने पर निकल सकते हैं और उसी कैटेगरी का बेहतर फंड चुन सकते हैं।


फंड के कोर फीचर में बदलाव होने पर अपने निवेश निणर्य की समीक्षा करें। फंड का कोर फोकस क्या है ये समझें। डायवर्सिफाइड फंड सेक्टोरल निवेश में स्विच कर सकता है या बैलेंस्ड फंड में एएमसी इक्विटी की बजाय डेट में ज्यादा निवेश करने का फैसला ले सकती है। ऐसे में अगर आप नए फीचर से संतुष्ट नहीं हो तो फंड से निकल जाएं।


समय-समय पर पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करने की जरूरत होती है। लक्ष्य, उम्र के हिसाब से पोर्टफोलियो में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। 50 की उम्र पार करने पर इक्विटी में निवेश घटाएं। बाजार में जोरदार तेजी के बाद बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है। रिस्क को समझते हुए बदलाव करने की जरूरत होती है। निवेश की अवधि के हिसाब से भी बदलाव करें।


अगर लक्ष्य पूरे हो गए हों तो फंड से निकल जाएं। प्लानिंग हमेशा लक्ष्य तय करने के बाद करें। अगर लक्ष्य पाने में दिक्कत हो रही है तो निकल सकते हैं। फंड का प्रदर्शन अच्छा नहीं तो भी निकल जाएं।


ध्यान रखें कि नीतिगत फैसलों का असर भी फंड पर पड़ता है। ट्रंप की कठोर नीतियों से आईटी और फार्मा फंड के प्रदर्शन पर असर पड़ा है। फंड मैनेजर को इन बदलावों को देखना होता है। फंड में टैक्स के हिसाब से बदलाव हो सकता है। एमएफ में 1 लाख से ज्यादा मुनाफे 10 फीसदी एलटीसीजी टैक्स लगता है। लंबी अवधि के लिए निवेश फायदेमंद होता है। बेहतर रिटर्न मिलने पर टैक्स की मार कम पड़ती है।