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नए नियमों के खिलाफ, एजेंट सेबी से खफा

म्युचुअल फंड एजेंट खुश नहीं हैं, उनका कहना है कि इससे ग्राहक को तो कोई फायदा नहीं होगा लेकिन इससे उनके कारोबार को नुकसान हो सकता है।
अपडेटेड May 09, 2016 पर 10:42  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

म्युचुअल फंड बेचने वालों को अब ग्राहकों को बताना होगा कि उन्हें कंपनी कितना कमीशन देती है। म्युचुअल फंड इंडस्ट्री से जुड़े सेबी के नए नियम 1 अक्टूबर से लागू होंगे। हालांकि इन नए नियमों से म्युचुअल फंड एजेंट खुश नहीं हैं, उनका कहना है कि इससे ग्राहक को तो कोई फायदा नहीं होगा, लेकिन इससे उनके कारोबार को नुकसान हो सकता है।


सेबी म्युचुअल फंड इंडस्ट्री में ज्यादा से ज्यादा पारर्दिशता लाना चाहती है। इसके लिए उसने कुछ नए नियम बनाएं हैं जो एजेंटों को रास नहीं आ रहे हैं। असल में 1 अक्टूबर से एजेंटों को बताना होगा कि उन्हें म्युचुअल फंड बेचने पर कितना कमीशन मिलता है। हालांकि एजेंट इस बात से भी सहमत नहीं हैं कि इससे इंडस्ट्री में ज्यादा पारर्दिशता आएगी।


दरअसल फिल्हाल एजेंट को हर म्युचुअल फंड की बिक्री पर 0.5-2.5 फीसदी तक का कमीशन मिलता है। सेबी के नियमों के मुताबिक किसी भी एजेंट को 2.5 फीसदी से ज्यादा कमीशन नहीं मिल सकता। एजेंट इस जानकारी को कारोबार की निजी सूचना मान रहे हैं और इसे इस तरह सार्वजनिक करना उन्हें अपने साथ नाइंसाफी लग रही है।


देश में करीब 25,000 रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइजर्स हैं जो म्युचुअल फंड बेचने का काम करते हैं। वो चाहते हैं कि इस कानून को लागू करने से पहले सेबी एक बार उनका पक्ष जरूर सुने। यही नहीं उनका ये भी मानना है कि सभी फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के लिए नियम एक समान होने चाहिए, ताकि इंडस्ट्री में सबसे लिए एक समान प्रतिस्पर्धा बनी रहे।


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