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बदली फंड की कैटेगरी, क्या करें निवेशक

सेबी चाहता है कि कंपनियां अपने प्रॉडक्ट की ऐसी कैटेगरी बनाएं, जिसमें पैसा लगाने का फैसला करने में निवेशकों को आसानी हो।
अपडेटेड Apr 23, 2018 पर 13:56  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

क्या आपको अपनी फंड स्कीम से जुडे बदलावों की मेल, कॉल्स और मैसेज आने शुरू हो गएं हैं? अगर हां? तो आपको अब ये सझना होगा की इन जानकारियों सेबी चाहता है कि कंपनियां अपने प्रॉडक्ट की ऐसी कैटेगरी बनाएं, जिसमें पैसा लगाने का फैसला करने में निवेशकों को आसानी हो। सेबी के दिशानिर्देश के मुताबिक, कोई भी फंड हाउस 10 तरह के इक्विटी फंड्स ऑफर कर सकता है। उसे 16 तरह की बॉन्ड स्कीमें और 6 कैटेगरी के हाइब्रिड फंड्स भी ऑफर करने की इजाजत है। इनके अलावा, वे इंडेक्स फंड, फंड ऑफ फंड्स और दूसरी सॉल्यूशन बेस्ड स्कीम्स लॉन्च कर सकते हैं। इसपर बात करने के लिए हमारे साथ मौजूद हैं फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या।


सेंट्रल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर यानि सीपीएफसी ने निर्देश दिए है कि अब पीएफ में 10 लाख से ज्यादा क्लेम ऑफलाइन कर सकेंगे। फिजिकल फॉर्म से 10 लाख से ज्यादा रकम निकासी संभव है। पहले 10लाख रुपये से ज्यादा क्लेम सिर्फ ऑनलाइन होता था। ईपीएस से 5 लाख से ज्यादा की रकम की निकासी ऑफलाइन संभव है। वेरिफिकेशन के लिए क्लेम फॉर्म एम्प्लॉयर को भेजा जाएगा। एम्प्लॉयर को 3 दिन में फॉर्म मंजूर या नामंजूर करना होगा। क्लेम को लेकर फ्रॉड और रिस्क कम करने के लिए कदम बढ़ाया है।


ऐसे में निवेशक फंड की यूनिट रिडीम कर सकते हैं। फंड से निकलने के लिए 30 दिन का समय मिला है। 30 दिनों में निकलने पर एग्जिट लोड नहीं होगा। हालांकि बाद में भी फंड से निकलने की सुविधा दी गई है। मर्ज होने पर निवेशक के पास ज्यादा विकल्प नही है, लेकिन फंड मर्ज होने पर टैक्स नहीं लगेगा। पोर्टफोलियो की समीक्षा करें। नई स्कीम की तुलना लक्ष्य से करें। नई स्कीम जरूरत के मुताबिक है तो बने रहें। पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन पर ध्यान दें। लक्ष्य को देख स्कीम से निकलने का फैसला करें।


अर्णव पंड्या ने आगे बताया कि सेबी  के नियमों से निवेशकों को फायदा मिल सकते है। इससे एक कैटेगरी में एक फंड हाउस का एक ही फंड होगा। फंड की निवेश कैटेगरी को लेकर कंफ्यूजन दूर होगा।