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म्युचुअल फंड स्कीम में बदलाव, आसान होगा फंड्स का चुनाव!

छोटी से छोटी बचत का सही निवेश भविष्य में आपके सपने पूरे करने में बड़ी मदद दे सकता है।
अपडेटेड Dec 13, 2017 पर 15:18  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

छोटी से छोटी बचत का सही निवेश भविष्य में आपके सपने पूरे करने में बड़ी मदद दे सकता है। चाहे बच्चों की पढ़ाई हो, घर या गाड़ी का सपना या सुकून भरी रिटायरमेंट, सभी लक्ष्यों के लिए सही निवेश ही है चाबी। म्युचुअल फंड को एकरूपता देने के लिए सेबी ने म्युचुअल फंड स्किम को नई परिभाषा देने की तैयारी कर ली है, और इसके तहत स्किम की कैटगरी में फेरबदल किया है। निवेशक को फंड पहचानने में और अपने लक्ष्य के तहत निवेश करने में आसानी हो इसको ध्यान में रखते हुए सेबी ने एहम बदलाव किए हैं। हमारा साथ देने के मौजूद है वाइस इन्वेस्ट एडवाइजर के हेमंत रूस्तगी।


हेमंत रूस्तगी का कहना है कि निवेशक के लिए म्युचुअल फंड का चुनाव आसान होगा। निवेशक लक्ष्य के मुताबिक स्कीम में निवेश कर सकता है। म्युचुअल फंड हाउस को स्कीम रिव्यू कर सेबी को प्रपोजल भेजना होगा। सेबी के निर्देश के अनुसार फंड हाउस को स्कीम को मर्ज या बदलना पड़ेगा। सेबी की मंजूरी के बाद 3 महीने में बदलाव करना जरूरी है। हालांकि बदलाव होने पर निवेश को स्कीम से निकलने का विकल्प है। हर कैटेगरी में एक स्कीम लाने की अनुमति होगी। 


बता दें कि सेबी की तरफ से म्युचुअल फंड को इक्विटी, हाइब्रिड, सॉल्यूशन ओरिएंटेड, डेट की कैटगरी में बदलाव किया गया है। इक्विटी कैटेगरी में 10 स्किम लाने की अनुमति दी गई है। जिसमें
मल्टी कैप में 65 फीसदी इक्विटी, लार्ज कैप में 80 फीसदी इक्विटी, मिड कैप में 65 फीसद मिड कैप स्टॉक में निवेश करने की सलाह होगी। स्मॉलकैप में 65 फीसदी स्मॉल कैप में निवेश, लार्ज और मिडकैप फंड में 35 फीसदी का निवेश दोनो क्लास में करना होगा। डिविडेंड यील्ड फंड में 65 फीसदी डिविडेंड देने वाले स्टॉक में बदलाव किया गया है। वैल्यू फंड और कॉंन्ट्रा फंड का 65 फीसदी इस तरह के स्टॉक में निवेश किया जा सकता है।