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बदली फंड की कैटगरी, क्या हो निवेशकों की रणनीति

सेबी के दिशा निर्देशों के अनुसार फंड हाउस ने स्कीम में बदलाव करने शुरू कर दिए हैं।
अपडेटेड May 04, 2018 पर 17:32  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सेबी के दिशा निर्देशों के अनुसार फंड हाउस ने स्कीम में बदलाव करने शुरू कर दिए हैं। और योर मनी के जरिए हम आपको इस बात की लगातार जानकारी दे रहें हैं के, अगर आपकी स्कीम में भी कोई बदलाव हुए हैं, तो क्या ये वक्त है उन्हे बदलने का है? आगर आप बने रहना चाहते हैं, तो क्या ये स्कीम आपके लक्ष्य के मुताबिक, अब सही है? आज हम इन्ही बातों के जवाब लेकर हाजिर हैं जिसमें हमारा साथ देने के लिए मौजूद है वाइस इंवेस्ट एडवाइजर के हेमंत रूस्तगी।


हेमंत रूस्तगी का कहना है कि फंड हाउस के स्कीम में बदलाव को देखते हुए निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए। पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन पर ध्यान दें। फंड से निकलने के लिए 30 दिन का समय मिलेगा। 30 दिनों में निकलने पर एग्जिट लोड नहीं लगेगा। लक्ष्य के आधार पर स्कीम से निकलने का फैसला करें। सेबी की तरफ से कैटेगरी


बता दें कि सेबी की तरफ से म्युचुअल फंड को इक्विटी, हाइब्रिड, सॉल्यूशन ओरिएंटेड, डेट की कैटगरी में बदलाव किया गया है। इक्विटी कैटेगरी में 10 स्किम लाने की अनुमति दी गई है। जिसमें
मल्टी कैप में 65 फीसदी इक्विटी, लार्ज कैप में 80 फीसदी इक्विटी, मिड कैप में 65 फीसद मिड कैप स्टॉक में निवेश करने की सलाह होगी। स्मॉलकैप में 65 फीसदी स्मॉल कैप में निवेश, लार्ज और मिडकैप फंड में 35 फीसदी का निवेश दोनो क्लास में करना होगा। डिविडेंड यील्ड फंड में 65 फीसदी डिविडेंड देने वाले स्टॉक में बदलाव किया गया है। वैल्यू फंड और कॉंन्ट्रा फंड का 65 फीसदी इस तरह के स्टॉक में निवेश किया जा सकता है।