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बदली फंड की परिभाषा, क्या फंड का चुनाव होगा आसान!

सेबी की तरफ से म्यूचुअल फंड में पारदर्शिता और एकरूपता लाने के लिए म्युचुअल फंड की कैटेगरी में बदलाव किए हैं।
अपडेटेड Feb 19, 2018 पर 09:53  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

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सेबी की तरफ से म्यूचुअल फंड में पारदर्शिता और एकरूपता लाने के लिए म्युचुअल फंड की कैटेगरी में बदलाव किए हैं। 5 कैटेगरी बनाई गई हैं, जिनके तहत फंड हाउस को स्कीम लानी होगी। अब इसी कडी में मोतीलाल ओसवाल और डीएसपीबीआर ने अपने कुछ फंड की परिभाषा बदली है।


निवेशक के लिए म्यूचुअल फंड का चुनाव करना आसान है। निवेशक लक्ष्य के मुताबिक स्कीम में निवेश करें। म्यूचुअल फंड हाउस को स्कीम रिव्यू कर सेबी को प्रपोजल भेजना होगा। सेबी के निर्देश के मुताबिक फंड हाउस को स्कीम को मर्ज या बदलना पड़ेगा। सेबी की मंजूरी के बाद 3 महीने में बदलाव करना जरूरी है। बदलाव होने पर निवेश को स्कीम से निकलने का विकल्प है। हर कैटेगरी में एक स्कीम लाने की इजाजत मिलेगी।


सेबी की कैटेगरी पर बात करें तो इक्विटी, डेट, हाइब्रिड, सॉल्यूशन ओरिएंटेड और दूसरी स्कीम में बदलाव किया गया है। इक्विटी कैटेगरी में 10 स्कीम लाने की इजाजत दी गई है।  मल्टीकैप में 65 फीसदी इक्विटी, लार्जकैप में 80 फीसदी  इक्विटी, मिडकैप में 65 फीसदी, मिडकैप स्टॉक में निवेश और स्मॉलकैप में 65 फीसदी स्मॉलकैप में निवेश कर सकते है।


लार्ज और मिडकैप फंड में 35 फीसदी का निवेश दोनों क्लास में किया जा सकता है। वहीं डिविडेंड यील्ड फंड में 65 फीसदी डिविडेंड देने वाले स्टॉक में बदलाव करने की इजाजत दी गई है। वैल्यू फंड और कॉंन्ट्रा फंड का 65 फीसदी इस तरह के स्टॉक में निवेश कर सकते है। फोकस्ड फंड का कम से कम 30 स्टॉक में निवेश कर सकते है। जबकि सेक्टर या थीमेटिक फंड में 80 फीसदी निवेश और ईएलएसएस फंड का 80 फीसदी निवेश इक्विटी फंड में किया जायेगा।