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एसआईपी में आ सकती है गिरावट: यूबीएस सर्वे

यूबीएस ने सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान पर एक सर्वे कराया है जिससे खुलासा हुआ है आगे एसआईपी में कमी आ सकती है।
अपडेटेड Aug 30, 2018 पर 13:58  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

ब्रोकरेज फर्म यूबीएस ने एसआईपी यानि सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान पर एक सर्वे कराया है जिससे खुलासा हुआ है आगे एसआईपी में कमी आ सकती है। यूबीएस के सर्वे में सामने आया है कि एसआईपी के जरिए बढ़ते निवेश पर रोक लग सकती है। 55 फीसदी लोगों ने म्युचुअल फंड से पैसे निकाले हैं और नया निवेश रोक दिया है। निगेटिव रिटर्न दिखा तो निवेश पर ब्रेक लग सकता है। पिछले साल 124 डायवर्सिफाइड फंड में से 23 के रिटर्न निगेटिव रहे थे।


हालांकि पिछले 5 साल के म्युचुअल फंड के प्रदर्शन गौर करते हैं तो दिलचस्प तथ्य सामने आ रहे हैं। 5 साल के प्रदर्शन से पता चलता है कि एसआईपी के जरिए निवेश फायदे का सौदा साबित हुआ है। स्मॉलकैप फंडों में 5 साल के दौरान रिलायंस स्मॉलकैप फंड ने 40 फीसदी, डीएसपी स्मॉलकैप फंड ने 35 फीसदी और एचएसबीसी स्मॉलकैप फंड ने 33 फीसदी का रिटर्न दिया है। मिडकैप फंडों में 5 साल के दौरान कोटक इमर्जिंग इक्विटी ने 34 फीसदी, एलएंडटी मिडकैप फंड ने 33 फीसदी और एचडीएफसी मिडकैप अपॉर्च्युनिटीज फंड ने 31 फीसदी का रिटर्न दिया है।


लार्जकैप फंडों में 5 साल के दौरान एलएंडटी लार्जकैप फंड ने 38 फीसदी, जेएम कोर 11 फंड ने 28 फीसदी और रिलायंस लार्जकैप फंड ने 24 फीसदी का रिटर्न दिया है। मिड, लार्जकैप फंडों में 5 साल के दौरान कैन रोबेको इमर्जिंग इक्विटीज ने 37 फीसदी, मिरे इमर्जिंग ब्लूचिप ने 36 फीसदी और प्रिंसिपल इमर्जिंग ब्लूचिप ने 33 फीसदी का रिटर्न दिया है।