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गिरते बाजार में बदली म्यूचुअल फंड की चाल, क्या करें

बाजार में उतार चढाव के चलते म्यूचुअल फंड की परफॉर्मेंस में हम गिरावट देखकर घबरा जाते हैं।
अपडेटेड Mar 23, 2018 पर 09:53  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बाजार में उतार चढाव के चलते म्यूचुअल फंड की परफॉर्मेंस में हम गिरावट देखकर घबरा जाते हैं और जब रिटर्न नैगेटिव होने लगे, तो चिंता गहरा जाती है। पिछले 1 साल में खासतौर से हमने अगर कुछ फंड के रिटर्न में गिरवट देखी है, तो कुछ फंड ने बेहतर परफॉर्म किया है। इन सभी पर बात करने के लिए हमारे साथ मौजूद है  वाइसइन्वेस्ट एडवाइजर्स के सीईओ हेमंत रुस्तगी।


हेमंत रुस्तगी का कहना है कि ग्लोबल संकेतों के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और बाजार की इस तेज गिरावट का असर म्यूचुअल फंड पर परफॉर्मेंस पर देखने को मिल रही है। इस गिरावट का असर इक्विटी फंड्स पर सबसे ज्यादा हुआ है।  फंड के एसेट एलोकेशन के हिसाब से बाजार की गिरावट का असर देखने को मिल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि बजट 2018 में आए एलटीसीजी टैक्स का भी असर बाजार पर पड़ा है। बाजार की यह उतार-चढ़ाव कुछ महीनों के लिए जारी रहेगी। जनवरी के बाद बड़ी गिरावट आई है। पहले के मुनाफे वाले निवेश पर भी असर पड़ा है।


ऐसे में निवेशकों को चाहिए कि वह बाजार की गिरावट से बिना घबराएं एसआईपी के जरिए निवेश से एवरेजिंग से फायदा लेते रहें। एसआईपी के निवेश का बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है। हालांकि लक्ष्य हासिल करने के लिए निवेश में अनुशासन जरूरी है। एसआईपी का निवेश से लंबी अवधि में फायदा मिलता है। निवेशक अपने लक्ष्य को निवेश से जोड़ें।


सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानि एसआईपी, नियमित निवेश का जरिया है। एसआईपी के जरिए कम से  कम से 100 की एसआईपी कर सकते हैं। इसमें निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं है। एसआईपी में कम से कम 500 रुपये से 1000 रुपये का निवेश करें। फंड एसआईपी के पैसे बाजार में निवेश करता है। फंड तयशुदा थीम में निवेश करता है जिससे एसआईपी केज एवरेजिंग के फायदे मिल सकता है।


म्युचुअल फंड में निवेश के विकल्प पर बात करते हुए ने हेमंत रुस्तगी आगे कहा कि डायरेक्ट प्लान में बिना एजेंट सीधा एएमसी से फंड खरीद कर निवेश करता है और डायरेक्ट प्लान को ऑनलाइन, ऑफलाइन दोनों ही जगह खरीद सकते हैं। लेकिन ऑफलाइन प्लान लेने पर फॉर्म भरना पड़ता है। ऑफलाइन प्लान में एजेंट आपकी जानकारी जमा करता है जबकि ऑनलाइन प्लान - ऑनलाइन बैंकिंग जैसे ही होता है। डायरेक्ट प्लान के लिए निवेश की जानकारी होना जरूरी है।


किसी भी दिन एसआईपी करने का फायदा यह है कि अकाउंट में पैसा नहीं होने का टेंशन खत्म हो जाता है। फंड फ्लो किसी 1 तारीख पर सीमित नहीं होता। इससे बाजार में मौकों का फायदा उठा सकेंगे और फंड मैनेजर्स भी बेहतर कदम लें सकते है। साथ ही फंड्स की परफॉर्मेंस में सुधार की संभावना अधिक हो जाती है।


एसआईपी के जरिए शेयर, गोल्ड और म्यूचुअल फंड में निवेश करना संभव है। हर महीने आय से पैसा निवेश करना आसान है। एसआईपी बैंक में रिकरिंग डिपॉजिट करने जैसा ही है। आरडी के मुकाबले एसआईपी के जरिए म्युचुअल फंड में निवेश पर फिक्स रिटर्न नहीं है।