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जाने म्युचुअल फंड निवेश से जुड़े 5 रिस्क

हर निवेश से जुडा कोई ना कोई रिस्क होता है। लेकिन इसका मतलब ये नही, के आप निवेश ना करें।
अपडेटेड Aug 24, 2017 पर 14:37  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

म्युचुअल फंड इंवेस्टमेंट इज सब्जेक्ट टू मार्केट रिस्क! ये लाइन, आपने अक्सर सुनी होगी। कई इसे अनसुना कर जाते है, तो कई इस डिस्क्लेमर से इतना डर जाते हैं की निवेश ही नहीं करते। लेकिन योर मनी के रहते आपको डर कैसा? आज योर मनी में आपको इस डिस्क्लेमर का मतलब समझाएंगे, यानी, आपके निवेश के साथ कौन सा जोखिम जुडा है और इस से आप कैसे बच सकते हैं, और कैसे निवेश की सही रणनीति बना सकते हैं, इसी पर होगा योर मनी का फोकस। आज इस चर्चा में शामिल हो रहे हैं फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या


हर निवेश से जुडा कोई ना कोई रिस्क होता है। लेकिन इसका मतलब ये नही, के आप निवेश ना करें और पैसे कमाने का सुनहरा मौका गवां दें। क्रेडिट रिस्क, इंटेरेस्ट रेट रिस्क, री-इंवेस्टमेंट रिस्क, मार्केट रिस्क, लिक्विडिटी रिस्क इन 5 तरह के जोखिम को अगर आप समझ लें तो निवेश रणनीति बनाना आसान हो जाएगा।


डेट में निवेश: क्रेडिट रिस्क


बता दें कि डेट में निवेश रिस्क फ्री नहीं है। इसमें कर्ज लेने वाली कंपनी के कर्ज ना चुका पाने का जोखिम होता है और निवेशक का निवेश डूबने का खतरा रहता है। लेकिन सरकारी सेक्योरिटीज में क्रेडिट रिस्क नहीं होता।


ब्याज दर का जोखिम


ब्याज दर बढ़ने से बॉन्ड के दाम घटेंगे यानि ब्याज दर बढ़ने से डेट निवेश पर नुकसान होगा। ब्याज दर घटने से डेट निवेश की वैल्यू बढ़ेगी। मेच्योरिटी तक बॉन्ड और डिबेंचर्स जैसे डेट निवेश रखने से रिस्क कम होता है।


रीइन्वेस्टमेंट रिस्क


इसको पैसे के दोबारा निवेश पर रिस्क कहते हैं। पैसे के रीइन्वेस्टमेंट पर नियम और शर्तें बदलने से रिस्क बढ़ जाता है। डेट इन्वेस्टमेंट में रिटर्न स्थिर नहीं है। डेट इन्वेस्टमेंट में रिटर्न समय-समय पर बदलता रहता है। लंबी अवधि के निवेश पर रीइन्वेस्टमेंट रिस्क पर ध्यान जरूर दिया जाना चाहिए।


बाजार से जुड़े रिस्क


ये बाजार के उतार-चढ़ाव से जुड़ा रिस्क है। उम्मीद से अलग बाजार की चाल पर रिस्क होता है। इक्विटी में निवेश पर मार्केट रिस्क होता है। खरीदने या बेचने के नजरिए पर बाजार की अलग चाल से नुकसान हो सकता है। निवेश पर स्टॉप लॉस रखकर ही ज्यादा नुकसान से बच सकते हैं।


लिक्विडिटी रिस्क


लॉक-इन पीरियड में निवेश कैश में नहीं बदल पाएंगे इसे ही लिक्विडिटी रिस्क कहा जाता है। खरीदार न होने की वजह से लिक्विडिटी रिस्क आ सकता है। रीयल एस्टेट और इक्विटी के निवेश पर लिक्विडिटी रिस्क ज्यादा होता है। इस पर काबू पाने के लिए निवेश डायवर्सिफाइड रखें।