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योर मनीः निवेश के बाद कब करें फंड का रिव्यू!

आपका निवेश पोर्टफोलियो आपके तमाम सपने पूरे करता है। तो ऐसे में अपने निवेश पर नजर रखना भी जरूरी है।
अपडेटेड Aug 18, 2017 पर 13:19  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आपका निवेश पोर्टफोलियो आपके तमाम सपने पूरे करता है। तो ऐसे में अपने निवेश पर नजर रखना भी जरूरी है। लेकिन ये ट्रैक कब, कितना और कैसे रखें। क्या है अपने फंड्स की परफॉर्मेस को चेक करने का सही तरीका। इन तमाम सवालों के जबाव देने के लिए हमारे साथ मौजूद है डायरेक्टर रूंगटा सिक्योरिटीज हर्षवर्धन रूंगटा।


हर्षवर्धन रूंगटा का कहना है कि रोज-रोज फंड्स की एनएवी देखने की जरूरत नहीं है लेकिन, समय-समय पर फंड की समीक्षा जरूर करें। म्युचुअल फंड्स में बाजार से जुड़े फायदे होते है। बाजार में तेजी या मंदी का चक्र चलता है। इसलिए म्युचुअल फंड्स में फायदे या असर देखने के लिए थोड़ा इंतजार करें।


निवेशक एसआईपी से इक्विटी म्युचुअल फंड्स में निवेश करता है तो वह 2 साल में एक बार अपने फंड्स की समीक्षा करें। एकमुश्त निवेश की साल में 1 बार समीक्षा करें। बाजार में भारी उतार-चढ़ाव आने पर भी निवेश की समीक्षा करें। डेट स्कीम में निवेश को हर 6 महीने पर समीक्षा करें। रेट में बदलाव या कटौती होने पर भी समीक्षा कर सकते है।


निवेशक अपने फंड्स की समीक्षा इन बातों पर कर सकते है। अपने म्युचुअल फंड का रिटर्न देखें। बेंचमार्क से बेहतर रिटर्न मिलने पर फंड अच्छा होता है। बाजार में गिरावट के दौरान बेंचमार्क से कम नुकसान होता है। आपके चुने हुए फंड्स पर हमेशा सबसे अच्छे रिटर्न नहीं मिलेंगे। फंड हाउस की क्वॉलिटी पर भी ध्यान रखें। बाजार के अलग-अलग चक्रों में फंड का परफॉर्मेस देखें। रिस्क मैनेजमेंट के लिए फंड हाउस के कदमों पर ध्यान दें।


एनएवी का  परफॉर्मेस से कोई संबंध नहीं होता है। एनएवी से सिर्फ निवेशक के कुल युनिट्स का पता चलता है। स्कीम के रिटर्न का एनएवी रेट से कोई संबंध नहीं होता। समीक्षा करते वक्त रिटर्न पर ध्यान दें।