Moneycontrol » समाचार » बाज़ार खबरें

मोदी सरकार के दौरान 2 फीसदी और UPA कार्यकाल में 59 फीसदी महंगा हुआ था पेट्रोल

प्रकाशित Mon, 15, 2019 पर 18:00  |  स्रोत : Moneycontrol.com

नरेंद्र मोदी सरकार के दौरान पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर आम लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। क्रूड की कीमतों में कमी के बावजूद जब पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं घट रहे थे तो लोगों में एक रोष था। कुछ लोग उस वक्त नरेंद्र मोदी सरकार की तुलना यूपीए सरकार से कर रहे थे। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि नरेंद्र मोदी के 16 मई 2014 को शपथ लेने से लेकर आज तक यानी 15 अप्रैल के बीच कुछ पेट्रोल की कीमतों में कुछ खास बढ़ोतरी नहीं हुई है।


नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण करने के बाद 7 जून 2014 को पेट्रोल की कीमत 71.51 रुपए प्रति लीटर थी। तब क्रूड का भाव 102.66 डॉलर प्रति बैरल था। आज यानी 15 अप्रैल 2019 को पेट्रोल का भाव दिल्ली में 73.04 रुपए प्रति लीटर है। जबकि क्रूड प्राइस 70.99 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। इस तुलना से साफ है कि नरेंद्र मोदी ने जब सत्ता संभाली थी तब के मुकाबले आज पेट्रोल प्राइस में सिर्फ 2.1 फीसदी का इजाफा हुआ है।


क्या था UPA के दौरान पेट्रोल का हाल


आपको बेहद हैरानी होगी कि मनमोहन सिंह की अगुवाई में यूपीए के पहले कार्यकाल और दूसरे कार्यकाल के बीच पेट्रोल की कीमतों में 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई थी। यूपीए के पहले कार्यकाल में जब मनमोहन सिंह की सरकार बनी तो 15 जून 2004 पेट्रोल का भाव 35.71 रुपए प्रति लीटर था। इसके बाद जब जुलाई 2009 में दूसरा कार्यकाल शुरू हुई तब पेट्रोल 44.72 रुपए प्रति डॉलर बिक रहा था। इस वक्त क्रूड 69.45 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से बिक रहा था।


 2014 में जब यूपीए की सरकार गई तब पेट्रोल 71.51 रुपए प्रति लीटर था और क्रूड 102.66 डॉलर पर चल रहा था। यूपीए का दूसरा कार्यकाल शुरू होने और खत्म होने के बीच क्रूड के प्राइस में 59.9 फीसदी का इजाफा हुआ था। इस तुलना का सीधा मतलब है कि नरेंद्र मोदी सरकार के मुकाबले यूपीए के कार्यकाल के दौरान पेट्रोल की कीमतें ज्यादा बढ़ी थीं।