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'राम चबूतरा, सीता रसोई और आंगन से दावा छोड़ने को तैयार था मुस्लिम पक्ष'

मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने किया है दावा
अपडेटेड Nov 07, 2019 पर 09:26  |  स्रोत : Moneycontrol.com

देश के प्रतिष्ठित मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने बुधवार को दावा किया कि उन्होंने मध्यस्थता समिति से कहा था कि बाबरी मस्जिद-राम जन्म भूमि विवाद मामले में मुस्लिम पक्षकार राम चबूतरा, सीता रसोई और सहन (आंगन) के हिस्से पर अपना दावा छोड़ने को तैयार है और तीन गुंबदों के नीचे की जगह मांग रहा है।


मौलाना मदनी ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- मध्यस्थता की कोशिश 11-12 बार नाकाम हो चुकी थी, लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए कहा तो मैं मध्यस्थता के लिए सहमत हो गया। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता का मतलब है कि सभी पक्षकार अपने-अपने रुख में थोड़ा नरमी लाएं। अगर कोई पीछे नहीं हटता है तो मध्यस्थता नहीं होगी।


जमीयत प्रमुख ने कहा कि बाबरी मस्जिद में एक हिस्सा गुंबद के नीचे का है और एक उसका सहन है, जहां राम चबूतरा और सीता रसोई है। उन्होंने कहा- हमारा झगड़ा इसे लेकर है। हम इसे अपना हिस्सा बताते हैं और वे (हिंदू पक्षकार) कहते हैं कि राम चबूतरा भगवान राम का जन्मस्थान है।


मदनी ने कहा- हमने कहा कि तीन गुंबदों और इसके सामने वाला हिस्सा मस्जिद के लिए छोड़ दिया जाए और गैर मुस्लिम इस पर से अपना दावा वापस लें।


उन्होंने बताया- हमने मध्यस्थों से कहा कि अगर वे (हिंदू पक्षकार) पीछे हटते हैं तो हम इस बात पर गौर कर सकते हैं कि सहन के हिस्से (जिसमें राम चबूतरा और सीता रसोई) पर दावा छोड़े दें। हालांकि वह मस्जिद का हिस्सा है।


उन्होंने कहा कि लेकिन रामलला और निर्मोही अखाड़ा एक इंच भी पीछे नहीं हटे और उनका एक ही मुद्दा था कि मुसलमान मस्जिद उन्हें दें दें। इसलिए मध्यस्थता कामयाब नहीं हुई।


बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने ने अयोध्या विवाद को आपसी सहमति से हल करने के लिए तीन मध्यस्थों की एक समिति गठित की थी। इस मामले पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और 15 नवंबर के पहले इस पर फैसला आना है।


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