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RBI पूरा नहीं कर पाया है Basel III के नियम

Basel III रेगुलेशन से यह पक्का होता है कि कोई बैंक बहुत ज्यादा जोखिम लेकर इकोनॉमी को नुकसान ना पहुंचाए।
अपडेटेड Jun 19, 2019 पर 14:58  |  स्रोत : Moneycontrol.com

रिजर्व बैंक Basel III के नियमों को पूरा नहीं कर पाया है। Basel कमिटी ऑन बैंक सुपरविजन (BCBS) की एक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। BCBS ने अपनी छमाही रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया है।


BCBS, बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के तहत बनाई गई एक कमिटी है। कमिटी ने मई 2019 तक 30 ग्लोबल सिस्टेमेटिकली इंपॉर्टेंट बैंक्स (G-Sibs) के   Basel III स्टैंडर्ड को अपनाने के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है।  इस कमिटी का मकसद अहम सुपरवाइजरी मुद्दों को लेकर समझ बनाना और दुनिया भर में बैंकिंग सुपरविजन को बेहतर बनाना है।


क्या है कमिटी की रिपोर्ट?


कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि भारत के केंद्रीय बैंक ने अभी तक टोटल लॉस ऑब्जॉर्बिंग कैपेसिटी (TLAC) पर अपनी सिक्योरिटाइजेशन फ्रेमवर्क और नियम पब्लिश नहीं किए हैं। दुनिया भर में यह नियम 1 जनवरी 2018 से ही लागू हैं।


RBI ने अभी तक रिवाइज्ड पिलर 3 डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट पर रेगुलेशन का मसौदा तैयार नहीं किया है। जबकि यह 2016 के अंत से ही लागू है।


पिलर 3 डिस्क्लोजर्स का मकसद बताए गए फॉरमैट में डिस्क्लोजर के जरिए बाजार में अनुशासन बनाए रखना है। पिलर 1 का फोकस कैपिटल एडेक्वेसी (पूंजी पर्याप्तात) और पिलर 2 का फोकस सुपरवाइजरी रिव्यू प्रोसेस पर रहता है। 
 
क्या है Basel III?


Basel III इंटरनेशनल बैंकिंग रेगुलेशन हैं जो बैंक ने बनाया था। इसका मकसद इंटरनेशनल सेटलमेंट के जरिए इंटरनेशनल फाइनेंशियल सिस्टम में स्टेबिलिटी सुनिश्चित करना है। Basel III रेगुलेशन से यह पक्का होता है कि कोई बैंक बहुत ज्यादा जोखिम लेकर इकोनॉमी को नुकसान ना पहुंचाए।