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Boris Johnson बने UK के नए PM, कभी TIMES न्यूजपेपर से निकाल दिया गया था

ये लगभग तय था कि बोरिस ही यूके के अगले प्रधानमंत्री चुने जाएंगे।
अपडेटेड Jul 23, 2019 पर 17:04  |  स्रोत : Moneycontrol.com

ब्रिटेन की गवर्निंग कंजर्वेटिव पार्टी ने मंगलवार को बोरिस जॉनसन को अपना नया लीडर चुन लिया, इसके साथ ही वो ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं।


मई महीने में टेरीसा मे के इस्तीफे के बाद से ही ब्रिटेन का नया प्रधानमंत्री चुने जाने की कवायदें चल रही थीं। इस पद के लिए बोरिस जॉनसन और जेरेमी हंट का नाम आगे चल रहा था लेकिन ये लगभग तय था कि बोरिस ही यूके के अगले प्रधानमंत्री चुने जाएंगे।


बता दें कि बोरिस जॉनसन और जेरेमी पिछले महीने से देशभर में कंजर्वेटिव पार्टी के सदस्यों का वोट पाने की कोशिश कर रहे थे। रिपोर्ट थी कि पार्टी के 70 फीसदी सदस्य बोरिस के साथ जा सकते हैं।


ब्रेक्जिट पर जोर


बोरिस जॉनसन ब्रेक्जिट को लेकर अपनी हार्ड पॉलिसी को लेकर जाने जाते हैं। वो ब्रेक्जिट पर टेरीसा मे से अलग राय रखते हैं। यहां तक कि ब्रेक्जिट प्लान पर विचार अलग होने की वजह से उन्होंने 2016 में विदेश सचिव के पद से इस्तीफा भी दे दिया था।


बोरिस ने ब्रेक्जिट को लेकर अपने कैंडिडेसी को खूब भुनाया है। उन्होंने डू ऑर डाई यानी करो या मरो जैसा वादा करते हुए कहा है कि वो तीन महीने में ब्रेक्जिट डील डन करवाएंगे। ब्रेक्जिट पर आखिरी डील 31 अक्टूबर तक होनी है।


जन्म, करियर और कंट्रोवर्सी


बोरिस जॉनसन का जन्म न्यूयॉर्क में एक ब्रिटिश माता-पिता से हुआ था। ऐसे में उनके पास अमेरिकी और ब्रिटिश नागरिकता दोनों है। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है।


उन्होंने 1987 में बतौर न्यूज ट्रेनी टाइम्स न्यूजपेपर जॉइन किया। लेकिन एक साल के अंदर ही उन्हें वहां से निकाल दिया गया क्योंकि उनपर किंग एडवर्ड द सेकेंड और उनके एक समलैंगिक प्रेमी पर एक रिपोर्ट में उन्होंने तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा था। इसके बाद उन्होंने डेली टेलीग्राफ के अलावा कई मीडिया संस्थानों में काम किया। और बाद में स्पेक्टेटर के एडिटर बने।


स्पेक्टेटर के एडिटर पद पर रहने के दौरान ही 2001 में बोरिस को हेनली के सांसद के तौर पर चुना गया। इसके बाद वो शैडो आर्ट्स मिनिस्टर और कंजर्वेटिव पार्टी के वाइस-चेयरमैन भी बने, लेकिन इन पदों से उन्हें एक पत्रकार के साथ एक्सट्रामैरिटल अफेयर को लेकर बोले गए झूठ के चलते यहां से भी हटा दिया गया।


बाद में वो हेनली से फिर एमपी बने। बोरिस आठ सालों तक लंदन के मेयर भी रहे हैं। 2016 में उन्हें टेरीसा मे के कार्यकाल में विदेश सचिव के तौर पर चुना गया था लेकिन मे के यूरोपियन यूनियन को छोड़ने के प्लान के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।