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अदानी ग्रुप को 6 एयरपोर्ट दिए जाने पर वित्त मंत्रालय और नीति आयोग ने जताई थी आपत्ति!

पिछले वित्त वर्ष 2019-2020 के दौरान मुंबई के साथ सात एयरपोर्ट अहमदाबाद, मैंगलोर, लखनऊ, जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम पर 7.90 करोड़ यात्रियों की आवाजाही रही
अपडेटेड Jan 16, 2021 पर 11:33  |  स्रोत : Moneycontrol.com

केंद्रीय वित्त मंत्रालय और नीति आयोग (Finance Ministry and Niti Aayog) ने 2019 में देश के छह एयरपोर्ट की बोली प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई थी, जिसकी अनदेखी कर इन सभी एयरपोर्टों को अडानी ग्रुप (Adani Group) को दे दिया गया। अहमदाबाद स्थित अडानी ग्रुप ने 6 एयरपोर्ट के लिए सबसे बड़ी बोली लगाई थी और इस ग्रुप ने देश के दूसरे सबसे बड़े मुंबई एयरपोर्ट को भी अक्वायर कर लिया है।


इंडियन एक्सप्रेस (Indian Express) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2019 में हुई बिडिंग की प्रक्रिया पर नीति आयोग और वित्त मंत्रालय ने आपत्ति जताई थी कि एक ही कंपनी को 6 एयरपोर्ट नहीं दिए जाने चाहिए लेकिन इसकी अनदेखी कर उन्हें दे दी गई। अडानी ग्रुप ने पिछले साल 31 अगस्त को देश के दूसरे सबसे बड़े मुंबई एयरपोर्ट में नियंत्रित हिस्सेदारी के लिए एक और करार किया था, जिसके बाद 12 जनवरी को एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इस एयरपोर्ट के अधिग्रहण को हरी झंडी दे दी। 


पिछले वित्त वर्ष 2019-2020 के दौरान मुंबई के साथ सात एयरपोर्ट अहमदाबाद, मैंगलोर, लखनऊ, जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम पर 7.90 करोड़ यात्रियों की आवाजाही रही। यह 34.10 करोड़ घरेलू हवाई यात्रियों का लगभग एक चौथाई है। इसके अलावा मुंद्रा एयरपोर्ट को भी पूर्ण इंटरनेशनल कमर्शियल एयरपोर्ट में तब्दील करने की मंजूरी मिली थी।


इंडियन एक्सप्रेस को मिले रिकॉर्ड से पता चलता है कि NDA सरकार के सबसे बड़े प्रिवेटाइजेशन प्रोग्राम के अंतरगत अहमदाबाद, लखनऊ, मैंगलोर, जयपुर, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट के लिए बोलियों को आमंत्रित किया गया था। केंद्र की पब्लिक प्राइवेट पार्नरशिप अप्रेजल कमेटी (PPPAC) ने सिविल एविएशन मिनिस्ट्री से 11 दिसंबर 2018 को इस प्रस्ताव पर चर्चा की थी।


इस मीटिंग के दौरान वित्त मंत्रालय की तरफ से दिए गए नोट में कहा गया था कि ये 6 एयरपोर्ट हाइली कैपिटल इंटेसिव प्रोजेक्ट (highly capital intensive projects) हैं और एक ही कंपनी को दे देना ठीक नहीं है। एक कंपनी को दो से ज्यादा एयरपोर्ट नहीं दिए जाने चाहिए। इस मामले में वित्त मंत्रालय ने दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के प्रेजिडेंट से भी संपर्क किया था। यहां जीएमआर ही केवल योग्य बिडर था लेकिन दोनों ही एयरपोर्ट उसे नहीं दिए गए। उसी दिन वित्त मंत्रालय के नोट पर नीति आयोग ने भी अलग चिंता व्यक्त की। नीति आयोग का कहना था कि PPP का मेमो सरकार की नीति के विरुद्ध है। 


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