Budget 2020: बजट में इनकम टैक्स में मिल सकती है राहत, फ्लैट रेट का ऐलान मुमकिन

कॉरपोरेट टैक्स की तरह ही किसी इंसेंटिव्स का फायदा ना लेने पर लोअर फ्लैट रेट से टैक्स चुकाने की सुविधा मिल सकती है
अपडेटेड Jan 15, 2020 पर 13:03  |  स्रोत : Moneycontrol.com

Budget 2020: इस साल बजट में सरकार नौकरी करने वाले टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दे सकती है। फाइनेंस मिनिस्ट्री बजट में ऐसी स्कीम का ऐलान कर सकती है कि अगर आप छूट का मोह छोड़ देते हैं तो आपको लोअर फ्लैट रेट पर टैक्स चुकाना पड़ेगा।


इनकम टैक्स का यह स्ट्रक्चर ठीक वैसा ही हो सकता है जैसा सितंबर 2019 में कॉरपोरेट टैक्स रेट पेश किया गया था। तब निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया था कि जो कंपनियां किसी तरह के छूट का इंसेंटिव्स का फायदा नहीं लेती हैं उनवके लिए कॉरपोरेट टैक्स 30 फीसदी से घटाकर 22 फीसदी कर दिया गया। नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स 15 फीसदी तक रखा गया है।


लाइव मिंट के मुताबिक, इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया, "पिछले साल कॉरपोरेट टैक्स में छूट देने के बाद सरकार अब इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स को राहत देने की तैयारी में है। टैक्स स्लैब में किसी बड़े बदलाव के लिए तो अभी इंतजार करना होगा लेकिन कॉरपोरेट सेक्टर जैसा ही इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स के लिए कोई स्कीम इस बार बजट में आ सकता है।"


क्या है मौजूदा टैक्स स्लैब?


फिलहाल 2.5 लाख रुपए की टैक्सेबल इनकम पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है। 2.5 लाख रुपए से लेकर 5 लाख रुपए तक के टैक्सेबल इनकम पर 5 फीसदी के हिसाब से टैक्स लगता है। 5 लाख रुपए से लेकर 10 लाख रुपए तक की टैक्सेबल आमदनी पर 20 फीसदी टैक्स लगता है। जबकि 10 लाख रुपए से ज्यादा टैक्सेबल इनकम पर 30 फीसदी का टैक्स देना पड़ता है। इसके अलावा 50 लाख रुपए से ज्यादा की टैक्सेबल आमदनी वाले सुपर रिच टैक्सपेयर्स पर सरचार्ज भी लगाती है।


सूत्रों का कहना है कि सरकार इनकम टैक्स का फ्लैट रेट 5 फीसदी से लेकर 30 फीसदी के बीच में रख सकती है। मुमकिन है कि यह रेट 15-18 फीसदी के बीच रह सकता है। साथ ही यह भी हो सकता है कि फ्लैट रेट सिर्फ 50 लाख रुपए से ज्यादा सालाना आमदनी वाले टैक्सपेयर्स के लिए लागू हो। 


क्या है छूट का हिसाब?


फिलहाल इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपए तक की छूट है। इसके अलावा सेक्शन 80CCD (1B) के तहत NPS में निवेश करने पर 50,000 रुपए की अतिरिक्त टैक्स छूट का फायदा मिलता है। इसके साथ ही हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम देने पर भी 25,000 रुपए तक टैक्स छूट का लाभ मिलता है।


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