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GST Return form अब पहले से भरा हुआ आएगा, भरे हुए GSTR-3B फॉर्म से Taxpayers को होंगे ये फायदे

प्रकाश कुमार ने कहा कि Taxpayers को GSTR-3B फाइल करते समय दो मुख्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है, ये उनकी लाइबिलिटी (Liability) और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से संबंधित होते हैं
अपडेटेड Sep 22, 2020 पर 09:16  |  स्रोत : Moneycontrol.com

बिजनेस करने वाले लोगों और टैक्पपेयर (Taxpayers) के लिए हर महीने जीएसटी रिटर्न (GST Return) दाखिल करना अब और आसान हो जाएगा। इसके लिए सरकार पहले से भरा हुआ जीएसटी रिटर्न फॉर्म GSTR-3B (pre-filled GST Return form GSTR-3B) लाने जा रही है। गूड्स एंड सर्विस टैक्स नेटवर्क (GSTN) के सीईओ प्रकाश कुमार (Prakash Kumar ) ने कहा कि GST से रजिस्टर्ड बिजनेस और इससे संबंधित लोगों के लिए रिटर्न दाखिल करने को सरल बनाने और उनका समय बचाने के लिए GSTN जल्द ही पहले से भरा हुआ GSTR-3B उपलब्ध कराएगा।

GSTN) के सीईओ प्रकाश कुमार ने कहा कि आमतौर पर Taxpayers को GSTR-3B फाइल करते समय दो मुख्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ये उनकी लाइबिलिटी (Liability) और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से संबंधित होते हैं। अभी टैक्सपेयर्स को इन दोनों आंकड़ों की गणना करने के लिए काफी समय खर्च करना पड़ता है। लेकिन अब ये दोनों काम सिस्टम के द्वारा ऑटोमैटिक तरीके से किया जाएगा और लोगों को पहले से भरा हुआ GSTR-3B मिलेगा। हालांकि, इसमें एडिट (edit) का ऑप्शन भी होगा, ताकि बिजनेसमैन जरूरत पड़ने पर अपने पुराने एडजस्टमेंट्स (past Adjustments) को आसानी से भर सकें।

ऐसे भरा जाएगा GSTR-3B फॉर्म

GSTR-3B फाइलिंग के लिए अब देनदारी यानी Liability की गणना सेल्स रिटर्न के आधार पर जीएसटीआर-1 (GSTR-1) को फाइल करने के ठीक बाद सिस्टम ब्रेक-अप के जरिये होगी। GSTN लाइबिलिटी की गणना करके इसे टैक्सपेयर (taxpayer) के GSTR-3B डैशबोर्ड पर पीडीएफ़ डॉक्यूमेंट (PDF Document) के रूप में उपलब्ध कराएगा। GSTN इस डेटा का उपयोग GSTR-3B दाखिल करने के लिए अगस्त 2020 और उसके बाद किया जा सकता है। इस समय यह यह सुविधा मासिक जीएसटीआर-1 फाइल करने वालों के लिए उपलब्ध है।

ऑटो-ड्राफ्टेड इनपुट टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट

इसके तहत सिस्टम Taxpayers के सप्लायर द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर इनवॉयस ब्रेक-अप (invoice break-up) के साथ आईटीसी स्टेटमेंट (ITC Statement) को ऑटो-जेनरेट करेगा। इससे टैक्सपेयर यह जान पाएंगे कि किसी महीने के लिए कितना आईटीसी (ITC) उपलब्ध है। इसके लिए GSTN ने एक नया फॉर्म GSTR-2B लॉन्च किया है। यह GSTR-2A स्टेटमेंट से अलग है, क्योंकि यह एक स्टैटिक डाक्युमेंट है। इसे हर महीने के लिए अगले महीने के 12वें दिन उपलब्ध कराया जाएगा। GSTN को उम्मीद है कि रिटर्न की लिंकिंग से लायबिलिटी की अंडर-रिपोर्टिंग (Under Reporting of Liability) और आईटीसी की ओवर-रिपोर्टिंग (Over repotring of ITC) पर अंकुश लग पाएगा। जब एक बार टैक्सपेयर द्वारा इन दोनों स्टेटमेंट का उपयोग शुरू हो जाएगा तो उनसे डेटा ऑटोमैटिक GSTR-3B में ट्रान्सफर होना शुरू हो जाएगा।

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