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Lockdown: 'इकोनॉमी के लिए सरकार को देना होगा 10 लाख करोड़ का पैकेज

अरविंद सुब्रमण्यन ने कहा है कि सरकार को इस डिसरप्शन से निकलने लिए 10 लाख करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे
अपडेटेड Apr 10, 2020 पर 20:16  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कोरोनावायरस (Coronavirus) की वजह से कई लोग बेरोजगार हो गए। ऐसे में अगर इस संक्रमण पर काबू पा भी लिया जाता है तो एक बड़ी मुश्किल हजारों लोगों के रोजीरोटी की होगी जिनकी नौकरी कोरोनावायरस संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से चली गई है।
इकोनॉमिस्ट और बिजनेस लीडर चाहते हैं कि सरकार ऐसे लोगों के लिए 10 लाख करोड़ रुपए का पैकेज लेकर आए।


फाइनेंस मिनिस्ट्री के पूर्व चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर अरविंद सुब्रमण्यन ने कहा है कि सरकार को महामारी के इस डिसरप्शन से उबरने के लिए 10 लाख करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे। यह देश के GDP का 5 फीसदी है।


सुब्रमण्यन ने उन तरीकों के बारे में बताया है कि अगले एक साल तक सरकार कैसे अपने अतिरिक्त खर्च के फंड जुटा सकती है। इसमें डेट मॉनेटाइज करने से लेकर RBI से कर्ज लेने तक के उपाय शामिल हैं।


लाइव मिंट के मुताबिक, इकोनॉमिक अफेयर्स डिपार्टमेंट के पूर्व सचिव सुभाष चंद्रा ने एक इंटरव्यू में कहा कि लॉकडाउन की वजह से करीब 10 करोड़ लोगों की नौकरी छिन गई है। सरकार को इन लोगों को तीन महीने तक हर महीने 2000 रुपए देने चाहिए।


गर्ग ने कहा, "सरकार ने पहले नॉन-वर्कर्स के लिए राहत पैकेज का ऐलान किया था। लॉकडाउन के बेहद गंभीर परिणाम हैं। हम लोगों की नौकरी जाने के बाद सेविंग्स पर जिंदगी चलाने के लिए नहीं छोड़ सकते हैं। " उन्होंने कहा कि सरकार को बिजनेस के लिए भी राहत पैकेज लाना चाहिए। यह 4 लाख करोड़ रुपए का होना चाहिए जो GDP का 2 फीसदी है। गर्ग ने अपने एक ब्लॉग पोस्ट में मंगलवार को यह लिखा था कि 21 दिनों के लॉकडाउन के दौरान दो तिहाई प्रोडक्शन का नुकसान हुआ है। वैल्यू के हिसाब से देखें को 8 लाख करोड़ रुपए का लॉस हो सकता है।


इंडस्ट्री बॉडी फिक्की ने कहा है कि सरकार को तुरंत 9-10 लाख करोड़ रुपए का राहत पैकेज देने की आवश्यकता है। फिक्की के डायरेक्टर दिलीप चिनॉय ने कहा कि सरकार इस फंड का इस्तेमाल इकोनॉमी को पटरी पर लाने, MSME को सपोर्ट करने और गरीबों को आर्थिक मदद देने में कर सकती है। सुब्रमण्यन और गर्ग दोनों का मानना है कि सरकार अभी बाजार से पैसा नहीं ले सकती इसलिए उसे RBI से ही कर्ज लेना चाहिए।


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