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Toolkit Case: दिल्ली कोर्ट ने जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा

दिल्ली पुलिस का आरोप है कि दिशा खालिस्तान समर्थकों के साथ यह Toolkit तैयार कर रही थी, साथ ही वह भारत को बदनाम करने की वैश्विक साजिश का हिस्सा थी
अपडेटेड Feb 23, 2021 पर 10:17  |  स्रोत : Moneycontrol.com

दिल्ली की एक अदालत (Delhi Court) ने सोमवार को टूलकिट केस (Greta Thunberg Toolkit Case) में गिरफ्तार 22 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि (Climate Activist Disha Ravi) को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा दिया। पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की पांच दिन के हिरासत के अनुरोध को ठुकरा दिया। बता दें कि दिशा को किसानों के विरोध-प्रदर्शन से संबंधित एक टूलकिट सोशल मीडिया पर शेयर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।


मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पंकज शर्मा ने पुलिस को दिशा रवि से हिरासत में पूछताछ करने की अनुमति दे दी, जब उसने कहा कि जलवायु कार्यकर्ता का इस मामले में अन्य सह-आरोपियों से आमना-सामना कराने की जरूरत है। रवि को तीन दिन की न्यायिक हिरासत समाप्त होने के बाद सोमवार को अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने शुक्रवार को रवि को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था, जब पुलिस ने कहा था कि फिलहाल उससे हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।


पुलिस ने कहा था कि सह-आरोपियों निकिता जैकब और शांतनु मुलुक के 22 फरवरी को पूछताछ में शामिल होने के बाद वह रवि को हिरासत में पूछताछ के लिये भेजने की मांग करेगी। बता दें कि किसानों के विरोध से संबंधित सोशल मीडिया पर टूलकिट शेयर करने और एडिट करने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने दिशा रवि को 13 फरवरी को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि वह खालिस्तान समर्थकों के साथ यह दस्तावेज (Toolkit) तैयार कर रही थी। साथ ही, वह भारत को बदनाम करने और किसानों के प्रदर्शन की आड़ में देश में अशांति पैदा करने की वैश्विक साजिश का हिस्सा थी।


दिल्ली हाई कोर्ट ने 19 फरवरी को कहा था कि टूलकिट मामले में दिशा रवि के खिलाफ दर्ज FIR की जांच के बारे में मीडिया में आई कुछ खबरें सनसनीखेज और पूर्वाग्रह से ग्रसित रिपोर्टिंग की ओर संकेत करती हैं। अदालत ने इस तरह की सामग्री को इस चरण में हटाने का आदेश देने से इनकार कर दिया, लेकिन साथ ही मीडिया प्रतिष्ठानों से कहा था कि लीक हुई जांच सामग्री प्रसारित नहीं की जाए। बहरहाल, हाई कोर्ट ने मीडिया प्रतिष्ठानों से कहा कि लीक हुई जांच सामग्री को प्रसारित नहीं किया जाए, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है।


अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह हलफनामा में दिए गए अपने इस रूख का पालन करे कि उसने जांच संबंधी कोई जानकारी प्रेस को लीक नहीं की और न ही उसका ऐसा कोई इरादा है। हाई कोर्ट ने कहा था कि टूलकिट मामले में पुलिस को कानून का और ऐसे मामलों की मीडिया कवरेज के सिलसिले में 2,010 के एजेंसी के ज्ञापन का पालन करते हुए प्रेस ब्रीफिंग करने का अधिकार है। अदालत ने मीडिया प्रतिष्ठानों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि केवल सत्यापित सामग्री ही प्रकाशित की जाए और वह जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि के खिलाफ दर्ज FIR के सिलसिले में चल रही जांच बाधित न करें।


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