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UNSC में भारत के नहीं होने से UN में भरोसे पर असर पड़ता है: विदेश मंत्री

भारत ने जोर देकर कहा है कि UNSC का स्थायी सदस्य बनाए जाने के लिए उसका पक्ष मजबूत है
अपडेटेड Oct 03, 2019 पर 10:47  |  स्रोत : Moneycontrol.com

भारत ने एक बार फिर United Nations Security Council में खुद को स्थायी जगह दिए जाने की वकालत की है। भारत ने जोर देकर कहा है कि UNSC का स्थायी सदस्य बनाए जाने के लिए उसका पक्ष मजबूत है और यहां भारत के नहीं होने से UN की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है।


विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी थिंक टैंक Centre for Strategic and International Studies में विदेश नीति पर भाषण देने के बाद वाशिंगटन में एक सभा को संबोधित करते हुए मंगलवार को कहा- अगर आपके पास... ऐसा संयुक्त राष्ट्र है जिसमें --संभवत: 15 साल में बनने वाला --दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश निर्णय लेने वालों में शामिल नहीं है, तो मैं मानता हूं कि इससे वह देश प्रभावित होता है।


जयशंकर ने एक सवाल के जवाब में कहा- लेकिन साथ ही मेरा यह भी समझना है कि इससे संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि इस संबंध में उसका पक्ष मजबूत है।


जयशंकर ने कहा- यह केवल सिक्योरिटी काउंसिल की बात नहीं है। देखिए, पीसकीपिंग ऑपरेशन किस तरह चलाए जा रहे है, कौन निर्णय ले रहा है। दूसरे पहलू भी हैं। मेरा मतलब है कि आप तर्क दे सकते हैं कि बजट कौन मुहैया कराता है और इसलिए वह भी एक फैक्टर होना चाहिए। यह तर्कसंगत बात है।


उन्होंने कहा- "आज दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों में से यह एक बड़ी चुनौती है, जिसका हम सभी पिछले 70 सालों से सामना कर रहे हैं। मैं यह नहीं कह रहा कि वे खत्म हो जाएंगे या अप्रासंगिक हो जाएंगे लेकिन निश्चित ही उनसे इतर भी बहुत कुछ हो रहा है और इससे नए तरह के अंतरराष्ट्रीय संबंध बन रहे हैं। हम सभी को इसे लेकर वास्तविक होने की आवश्यकता है।"


विदेश मंत्री ने कहा कि इसे समझने के लिए भविष्य में दूर तक देखने की जरूरत नहीं है, बल्कि असल में अतीत में झांकने की जरूरत है। उन्होंने कहा, "पांच साल, 10 साल, 15 साल पीछे देखिए। हमने देखा है कि कई संस्थान वैधता, उत्साह और दक्षता खोने के कारण दबाव में आ गए।"


जयशंकर ने कहा, "अगर बड़े देशों के हित पूरे नहीं होते हैं, तो वे कहीं ओर देखने लगेंगे। अगर आप व्यापार की ओर देखें, तो सच्चाई यह है कि आज फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स हुए हैं और यह इसलिए है क्योंकि महसूस हो रहा है कि ग्लोबल ट्रेड अरेंजमेंट नहीं होने वाला था।"


उन्होंने कहा, " हम अक्सर देखते हैं कि सिक्योरिटी सिचुएशंस में मिडिल ईस्ट में पिछले एक या दो दशक में देशों के गठबंधन बने हैं। इसके पीछे कुछ कारण यह है कि इन गठबंधनों में शामिल देशों के ही हित इससे जुड़े हैं या कुछ मामलों में वे दूसरे देशों को शामिल होने के लिए राजी नहीं कर पाए या कुछ मामलों में वे UN के पास गए लेकिन कोई रास्ता नहीं निकला और इसलिए उन्होंने कुछ और करने का फैसला लिया।"


उन्होंने यह कहते हुए कि यह वास्तविकता है, आगे जोड़ा कि "मैं मानता हूं, मेरा मतलब है कि मैं किसी संस्था को नहीं छोडूंगा और यह नहीं कहूंगा कि किसी संस्था के बजाए अनौपचारिक समाधान को प्राथमिकता दी जाए।" उन्होंने कहा,  "हरेक का पहला चयन प्रामाणिक विकल्प ही होगा, लेकिन आपके सामने वास्तविकता है, ऐसे देश हैं जो इससे परे या आस-पास देखते हैं।"


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