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कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी को ED ने किया गिरफ्तार, 354 करोड़ के बैंक फ्रॉड का है आरोप

ED ने दिल्ली कोर्ट के सामने कहा था कि रातुल पुरी जांच में सहयोग नहीं दे रहे हैं
अपडेटेड Aug 20, 2019 पर 15:56  |  स्रोत : Moneycontrol.com

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 354 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार कर लिया है। दो दिन पहले ही CBI ने इस मामले में रतुल पुरी और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। यह केस सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से दायर 354 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले में दर्ज किया गया है।


उन्हें प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है। मंगलवार यानी आज उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।


ED ने पुरी की गिरफ्तारी के एक दिन पहले ही दिल्ली की एक कोर्ट के सामने कहा था कि वो जांच में सहयोग नहीं दे रहे हैं।


बता दें कि सीबीआई ने सोमवार को इस केस में पुरी और इस केस से जुड़े दूसरे आरोपियों पर केस दर्ज किया था। एजेंसी ने इस केस में रतुल पुरी के अलावा, उनके पिता और मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक पुरी, कंपनी के डायरेक्टरों- उनकी मां नीता पुरी (कंपनी की डायरेक्टर और सीएम कमलनाथ की बहन), संजय जैन और विनीत शर्मा पर आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार के आरोपों में केस किया है।


केस की जांच के लिए सीबीआई ने केस में आरोपियों के घरों और ऑफिस को कुल मिलाकर छह लोकेशनों पर तलाशी ली थी।


क्या है केस?


यह मामला रतुल पुरी की कंपनी Moser Baer से जुड़ा हुई है। यह कंपनी ऑप्टिकल स्टोरेज मीडिया जैसे कि कॉम्पैक्ट डिस्क, डीवीडी या स्टोरेज डिवाइसेस बनाती है। मामला तब का है, जब वो इसके एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर थे। उन्होंने 2012 में इस पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उनके माता-पिता अपने पद पर बने रहे।


सीबीआई एफआईआर के मुताबिक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने कंपनी के खिलाफ कराए गए शिकायत में बताया था कि पुरी की कंपनी साल 2009 से ही कई बैंकों से लोन ले रही थी और इस दौरान कई बार Debt Restructuring की गई है। लेकिन जब कंपनी कर्ज नहीं चुका पाई तो एक फोरेंसिक ऑडिट किया गया और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 20 अप्रैल, 2019 को इस अकाउंट को फ्रॉड घोषित कर दिया गया।


बैंक ने आरोप लगाया है कि बैंकों की तरफ से कंपनी को दिए गए फंड का गलत तरीके से और कंपनी के डायरेक्टरों के निजी जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया गया है। वहीं डायरेक्टरों और प्रमोटरों ने Book Debts की रिपोर्टिंग को लेकर भी धोखाधड़ी की है, जो बैंक के प्राइमरी सिक्योरिटी में से एक था।


आरोप यह भी है कि कंपनी और इसके डायरेक्टरों ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से फंड रिलीज करवाने के लिए डॉक्यूमेंट में फर्जीवाड़ा किया था।


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