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एजाज लकड़ावाला ने किया खुलासा, 1998 में छोटा राजन ने दाऊद को मारने की कोशिश की थी

छोटा राजन के किसी सहयोगी की मदद से भारतीय एजेंसियों ने 1998 में दाऊद इब्राहिम को खत्म करने का प्रयास किया था लेकिन नाकाम रहा
अपडेटेड Feb 25, 2020 पर 09:07  |  स्रोत : Moneycontrol.com

गैंगस्टर एजाज लकड़ावाला (Ejaz Lakdawala) ने मुंबई पुलिस को बताया कि उनके करीबी सहयोगी छोटा राजन (Chhota Rajan) ने भगोड़े अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) को 1998 में मारने का प्रयास  किया था लेकिन उसका यह मिशन फेल हो गया।


50 साल के लकड़ावाला दाऊद इब्राहिम का खास था। मुंबई क्राइम ब्रांच के साथ पूछताछ में उसने इन बातों का खुलासा किया है। पिछले महीने वसूली और हत्या के मामले में लकड़ावाला को गिरफ्तार किया गया था। उसने पुलिस को बताया कि गैंगस्टर छोटा राजन का मिशन फेल होने के बाद छोटा शकील ने उसपर हमला किया था।


इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक,  क्राइम ब्रांच के एक सूत्र ने बकाया कि छोटा राजन के किसी सहयोगी की मदद से भारतीय एजेंसियों ने 1998 में दाऊद इब्राहिम को खत्म करने का प्रयास किया था। विकी मल्होत्रा, फरीद तनाशा, बालु डोकरे, लकड़ावाला, विनोद मटकार, संजय घाटे और बाबा रेड्डी  दाऊद को मारने 1998 में कराची गए थे लेकिन उनका मिशन नाकाम हो गया।


दाऊद इब्राहिम अपनी बेटी मारिया की मौत के बाद कराची के एक दरगाह में जाने वाले थे। सूत्रों ने बताया, "विकी मल्होत्रा और दूसरे लोग दाऊद का इंतजार कर रहे थे लेकिन उन्हें अपना मिशन बीच में ही खत्म करना पड़ा क्योंकि दाऊद इब्राहिम भारी-भरकम सिक्योरिटी के साथ दरगाह आया था।" माना जाता है कि दाऊद को नेपाल के किसी सांसद से इसकी बात की खबर मिली थी।


इसके बाद जब टीम अपने फ्लैट पर पहुंची तो छोटा राजन ने उन्हें तुरंत वह जगह छोड़ने को कही। छोटा राजन ने इन लोगों को बताया कि दाऊद इब्राहिम को इस मामले की भनक लग गई है। लकड़ावाला ने भी पुलिस को बताया था कि पाकिस्तानी पुलिस अगले दो हफ्तों में उन फ्लैट्स पर छापा मार सकती है। इसके साथ ही लकड़ावाला ने उन सभी हथियारों को जब्त कर लिया जो दाऊद इब्राहिम को मारने के लिए लाए गए थे।


इसके बाद मल्होत्रा ने उस नेपाली सांसद को मार दिया। साथ ही साल 2000 में छोटा राजन को दाऊद के सहयोगी मुन्ना झिंगाबाद ऊर्फ सय्यद मुद्दसर हुसैन ने मार दिया। हुसैन फिलहाल पाकिस्तान में है। लकड़ावाला पर 2002 में बैंकॉक के एक बिजी मार्केट में हमला किया गया था। लकड़ावाला का कहना है कि एक ताबीज की वजह से उसने 6 गोलियों की मार झेल ली। लकड़ावाला को मारने की कोशिश छोटा शकील के किसी सहयोगी ने की थी।


अपने ताबीज के बारे में लकड़ावाला ने पुलिस को बताया कि उसके एक सहयोगी सलीम पेनवाला उसे ताबीज देने बैंकॉक आया था। पेनवाला को भी पिछले महीने पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।


सूत्रों के मुताबिक, " हालांकि लकड़ावाला संदेह में था और वह खुद पेनवाला से मिलने नहीं जाना चाहता था। उसने अपनी पत्नी को ताबीज लेने भेजा। साथ ही यह हिदायत दी कि पेनवाला से मिलने के बाद वह सीधा घर ना आए। लेकिन उसने लकड़ावाला की बात नहीं मानी और सीधे घर आई।" इसके दो दिनों के बाद लकड़ावाला पर हमला हुआ था।


सूत्रों के मुताबिक, लकड़ावाला ने पुलिस को बताया है कि उस वक्त उसकी जेब में ताबीज थी जिसकी वजह से उसकी जान बच गई। साथ ही लकड़ावाला को जहां गोली लगी थी उससे अस्पताल नजदीक था। लिहाजा मेडिकल की सुविधा भी उसे जल्दी मिली। छोटा शकील ने अखबारों और टीवी चैनल में यह खबर फैला दी कि लकड़ावाला मारा गया। हालांकि कुछ लोगों ने शकील को बताया कि लकड़ावाला जिंदा है लेकिन उसने किसी की बात नहीं मानी। 


कुछ दिनों के लिए लोगों को इस बात पर विश्वास हो गया कि लकड़ावाला मारा गया। हालांकि कुछ दिनों के बाद जब उसने अपना धंधा दोबारा शुरू किया तो लोगों को उसके बारे में पता चला। सूत्रों के मुताबिक, इस हमले के बाद लकड़ावाला बेहद धार्मिक हो गया।


लकड़ावाला ने यह भी पुलिस को बताया कि वह इस बात को लेकर पक्का नहीं था कि पेनवाला इस हमले के पीछे था या नहीं। लेकिन उसके साथ काम करने वाला कोई बच नहीं गया था। लिहाजा उसे पेनवाला के साथ ही मिलकर वसूली का काम करना पड़ा। पुलिस का कहना है कि लकड़ावाला कुछ दिनों तक फर्जी वीजा पर नेपाल में रह रहा था।


सूत्रों ने बताया कि हमले में बचने के बाद लकड़ावाला पाकिस्तान गया ताकि दाऊद के बारे में ज्यादा जानकारी मिल सके। 9 जनवरी को मुंबई पुलिस की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल ने लकड़ावाला को गिरफ्तार किया था। बाद में लकड़ावाला ने दाऊद इब्राहिम से अलग हुए छोटा राजन के साथ धंधा करने लगा। 2008 में छोटा राजन दाऊद से अलग हो गया था। 


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