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फाइनेंस मिनिस्ट्री की जिद के बावजूद EPFO पर ब्याज घटाने को राजी नहीं लेबर मिनिस्ट्री

फाइनेंस मिनिस्टर चाहती है कि EPFO की ब्याज दर 8.65 फीसदी से कम कर दी जाए
अपडेटेड Jul 19, 2019 पर 12:05  |  स्रोत : Moneycontrol.com

EPFO (एंप्लॉयी प्रोविडंट फंड ऑर्गेनाइजेशन) के ब्याज दर को लेकर फाइनेंस मिनिस्ट्री और लेबर मिनिस्ट्री आमने सामने है। फाइनेंस मिनिस्ट्री चाहती है कि फिस्कल ईयर 2018-19 के लिए EPFO की ब्याज दर घटाकर 8.65 फीसदी से कम कर दी जाए। हालांकि लेबर मिनिस्ट्री ने फाइनेंस मिनिस्ट्री की यह मांग मानने से इनकार कर दिया। अगर लेबर मिनिस्ट्री EPFO पर ब्याज दर नहीं घटाती है तो इससे करीब 4.60 करोड़ सब्सक्राइबर को फायदा होगा।


इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि लेबर मिनिस्ट्री के पास 3150 करोड़ रुपए का पर्याप्त फंड है। लेबर मिनिस्ट्री को एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में निवेश से ज्यादातर रिटर्न हासिल हुआ है।


कौन तय करता है EPFO का इंटरेस्ट रेट


EPFO का इंटरेस्ट रेट ऑर्गेनाइजेशन का सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) तय करता है। निवेश से मिले रिटर्न का आंकलन करने के बाद ये EPFO का ब्याज दर तय करते हैं। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, नाम जाहिर न करने की शर्त पर सरकारी अधिकारियों ने बताया कि यह EPFO की ड्यूटी है कि जो रिटर्न मिले उसका हिस्सा सही तरीके से सब्सक्राइबर को दिया जाए।


CBT का चेयरमैन लेबर मिनिस्टर होता है। इसके साथ ही इसमें केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ ट्रेड यूनियन और औद्योगिक संगठन भी होते हैं।