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J&K पहुंचे EU सांसदों ने निर्दोषों की हत्या पर जताया दुख, कहा- विपक्ष को घाटी में आने की अनुमति दें

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने और इसे दो राज्यों में बांटे जाने के बाद से पहली बार कोई डेलीगेशन कश्मीर गया है
अपडेटेड Oct 30, 2019 पर 15:06  |  स्रोत : Moneycontrol.com

27 देशों वाले यूरोपियन यूनियन के 23 सांसद मंगलवार को कश्मीर दौरे पर पहुंचे थे। EU की संसद में कश्मीर की हालत पर चिंता जताए जाने के बाद यह सांसद ग्राउंड पर हालात का जायज़ा लेने इस यात्रा पर आए हैं। इस फॉरेन डेलीगेशन ने बुधवार को घाटी में अब तक छह गैर-कश्मीरी नागरिकों की हो चुकी हत्या पर दुख जताया। डेलीगेशन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि वो घाटी में वास्तविकता जानने आए हैं न कि भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप करने। डेलीगेशन के एक मेंबर निकोलॉस फेस्ट ने यह भी कहा कि जब ईयू के सांसदों को कश्मीर आने की इजाजत है तो भारतीय संसद के विपक्ष को क्यों नहीं?


यहां मीडिया से बात करते हुए प्रतिनिधि मंडल के एक सदस्य ने कहा- हम आपके दोस्त हैं, हम यहां हकीकत देखने आए हैं। डेलीगेशन ने कहा कि उनकी सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों से स्कूलों के खुलने और भ्रष्टाचार जैसे कई मुद्दों पर अच्छी बातचीत हुई। डेलीगेशन का कहना था कि वो आतंकवाद के खात्मे और शांति बहाल करने की भारत की कोशिशों में उसके साथ हैं।


बता दें कि जम्मू-कश्मीर से 5 अगस्त को आर्टिकल 370 हटाए जाने और इसे दो राज्यों में बांटे जाने के बाद से पहली बार कोई डेलीगेशन कश्मीर गया है, वो भी फॉरेन डेलीगेशन। इस कदम के बाद राज्य में किसी अनहोनी से बचने के लिए सरकार ने यहां पूरी तरीके से अघोषित कर्फ्यू और कम्यूनिकेशन लॉकडाउन कर दिया था। जम्मू और लद्दाख से लगभग हर बैन हटा लिया गया है लेकिन कश्मीर के एक बड़े हिस्से में अभी भी कुछ प्रतिबंध लगे हुए हैं।


यहां मंगलवार को इस डेलीगेशन की यात्रा के विरोध में कई जगह हिंसात्मक प्रदर्शन हुए। लोगों ने रास्ता ब्लॉक करने की कोशिश की और दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, सुरक्षाबलों ने यहां पैलेट गन भी फायर किया, जिसके चलते कम से कम चार प्रदर्शनकारी घायल हो गए।


उधर, यूनाइटेड नेशंस ने भारत से कश्मीर में पूरी तरीके से स्थिति सामान्य करने और कश्मीर की जनता को हर मानवाधिकार वापस करने का आग्रह किया है। यूएन ने मंगलवार को कहा कि घाटी में लोगों को कई तरीकों के अधिकारों से वंचित रखा गया है, जिसे तुरंत वापस किया जाना चाहिए।


UN High Commissioner for Human Rights के प्रवक्ता रूपर्ट कॉल्विल ने कहा कि यूएन को कश्मीरी जनता के अधिकारों की चिंता है और वो भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि यहां जनता के अधिकारों को लागू करे। उन्होंने कहा कि हालांकि, कई तरह के प्रतिबंध हटा लिए गए हैं लेकिन फिर भी यहां की स्थिति में बहुत सुधार नहीं है।


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