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महिला के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का मतलब यह नहीं कि वह 'बुरी मां' है: हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने कहा कि मां के विवाहेतर संबंध बच्चे की कस्टडी से इनकार करने का आधार नहीं हो सकते
अपडेटेड Jun 03, 2021 पर 15:45  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि एक महिला के विवाहेतर संबंध (Extramarital Affair) उसे बुरी मां (Bad Mother) के रूप में परिभाषित करने के लिए नहीं किया जा सकता है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि महिला का विवाहेतर संबंध इस बात का आधार नहीं हो सकता कि वह अच्छी मां नहीं है और ना ही इस आधार पर उसे अपने बच्चे की कस्टडी से रोका जा सकता है।


हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए बुधवार को उसकी साढ़े चार साल की बेटी की कस्टडी महिला को सौंप दी। कोर्ट का कहना है कि वैवाहिक विवाद में किसी महिला के विवाहेतर संबंधों की वजह से उसके बच्चे की कस्टडी से इनकार करने का कोई आधार नहीं है। याचिकाकर्ता महिला ने अपनी साढ़े चार साल की बेटी की कस्टडी के लिए अदालत में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। बच्ची फिलहाल महिला के अलग रह रहे पति के साथ है।


जस्टिस अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल ने याचिकाकर्ता महिला को बच्चे की कस्टडी देने की मंजूरी देते हुए कहा कि प्रतिवादी ने याचिकाकर्ता महिला के चरित्र पर आरोप लगाए हैं कि महिला का अपने किसी संबंधी के साथ विवाहेतर संबंध हैं। जस्टिस ग्रेवाल ने कहा कि याचिका में इस दावे के अलावा अदालत के समक्ष ऐसी कोई सामग्री या साक्ष्य पेश नहीं किया गया है, जो इसका समर्थन करता हो।


जस्टिस ग्रेवाल ने कहा कि पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं पर लांक्षण लगाना आम धारणा है। इससे भी बड़ी बात यह है कि बिना किसी ठोस बुनियाद पर महिलाओं को बदनाम किया जाता है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ यह की महिला का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर है या हो सकता है, के आधार पर यह सिद्ध नहीं किया जा सकता है कि वह बुरी मां है। इसलिए उसे बच्चे की कस्टडी से भी वंचित नहीं किया जा सकता।


जस्टिस ग्रेवाल ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता महिला के खिलाफ ये आरोप पूरी तरह से निराधार हैं और इन्हें नाबालिग बच्चे की कस्टडी से जुड़े मामले के फैसले के लिए प्रासंगिक नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि बच्चे को किशोरावस्था के दौरान अपने विकास के लिए मां का प्यार, देखभाल और स्नेह की जरूरत होगी।


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