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राज्यों के GST मुआवजे में हो सकती है भारी कमी, 14% रेट रखना हो रहा है मुश्किल

वित्त आयोग ने संकेत दिया है कि राज्यों को 14 फीसदी की दर से दिए जाने वाले जीएसटी मुआवजे की दर केंद्र के लिए ज्यादा हो रही है
अपडेटेड Dec 10, 2019 पर 16:12  |  स्रोत : Moneycontrol.com

GST (Goods and Services Tax) में राज्यों को मिल रहे मुआवजे को लेकर अभी कई राज्य केंद्र पर दबाव डाल रहे हैं, इसी बीच इसमें और कमी होने की आशंकाएं उठ सकती हैं। खबर है कि राज्यों को 14 फीसदी के दर से दिए जाने वाले जीएसटी के मुआवजे की दर को कम किया जा सकता है, क्योंकि केंद्र सरकार इस दर को मेंटेन नहीं कर पा रही।


CNBCTV18 ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि वित्त आयोग ने संकेत दिया है कि राज्यों को 14 फीसदी की दर से दिए जाने वाले जीएसटी मुआवजे की दर केंद्र के लिए ज्यादा हो रही है।


सूत्रों के मुताबिक, स्लोडाउन के चलते पेट्रोलियम, लिकर और स्टाम्प ड्यूटी कलेक्शन पर बहुत ज्यादा असर पड़ा है। राज्यों को 16,000 करोड़ के सेस कलेक्शन की जरूरत है लेकिन उन्हें 7,500 करोड़ का कलेक्शन ही मिल रहा है। सूत्रों ने बताया है कि वित्त आयोग ने सुझाव दिया है कि राज्यों को जीएसटी का मुआवजा देते रहने की अवधि 2022 से ज्यादा बढ़ानी चाहिए लेकिन इसकी दर कम की जानी चाहिए।


बता दें कि जीएसटी लागू होते वक्त GST (Compensation to States) Act, 2017 में केंद्र की ओर से राज्यों को भरोसा दिलाया गया था कि सरकार जीएसटी से होने वाले राजस्व के नुकसान की भरपाई के लिए राज्यों को  14 फीसदी की दर से जीएसटी मुआवजा देगी। ऐसा अगले पांच सालों तक करते रहने का प्रावधान बनाया गया था। यह दर 2015-16 के रेवेन्यू के आधार पर रखा गया है। हालांकि, पिछले तीन महीनों में जीएसटी कलेक्शन में लगातार कमी आई है, जिसके बाद राज्यों को इसका मुआवजा नहीं मिला है और उनकी वित्तीय स्थिति कमजोर हुई है।


बता दें कि 17-18 दिसंबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक होनी है, जिसमें राज्यों और केंद्र के अधिकारियों के बीच इस समस्या पर बात होगी।


रिपोर्ट में उच्चस्तरीय सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि राज्यों के अधिकारी और जीएसटी के स्टेकहोल्डर्स की ओर से सुझाव है कि 4 स्लैब वाले जीएसटी के स्ट्रक्चर को तीन स्लैब का कर दिया जाए, जिसके तहत 5 फीसदी के स्लैब को बढ़ाकर 8 फीसदी, 12 फीसदी के स्लैब को 18 फीसदी में मर्ज कर दिया और 28 फीसदी के स्लैब को वैसा ही रहने दिया जाए।


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