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सरकारी बैंकों के चीफ से FM की मुलाकात, MSME-NBFC को फंड मुहैया कराने पर जोर

इस बैठक में NBFC और MSME को पर्याप्त फंड मुहैया कराने पर भी बातचीत हुई
अपडेटेड Oct 15, 2019 पर 09:02  |  स्रोत : Moneycontrol.com

फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने आज सरकारी बैंकों के चीफ से मुलाकात की। इस बैठक में लोन सहित कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई।


फाइनेंस मिनिस्टर ने बैठक के बाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री के पास उन कंपनियों की एक लिस्ट हैं जिनका MSMEs पर 40,000 करोड़ रुपए बकाया है। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट अफेयर्स सेक्रेटरी और बैंकिंग सेक्रेटरी यह डाटा बैंकों को देंगे।


सीतारमण ने यह भी कहा कि ये डाटा मिलने के बाद बैंक इन सभी MSMEs से मुलाकात करेंगे और उनसे पूछेंगे कि क्या वो इस रकम में कोई डिस्काउंट दे सकते हैं। जिन कंपनियों पर यह रकम बकाया है उनका दावा है कि MSME पेमेंट के लिए छूट देने को तैयार हैं।


सीतारमण ने कहा कि उन्होंने मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स से यह निवेदन किया है कि वो सभी कंपनियों को लिखे कि "आपने दावा किया था कि MSMEs को इतनी रकम चुकानी है। क्या आप पेमेंट जल्दी चुकाएंगे।" फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा, हमारी कोशिश है कि MSMEs को दिवाली से पहले उनका बकाया मिल जाए।


बैंकों के विलय पर क्या कहा?


फाइनेंस मिनिस्टर ने बैंकों के विलय पर कहा कि पूरी प्रक्रिया सामान्य तौर पर चल रही है। एक बैंक बोर्ड के सभी सदस्य मेन बैंक बोर्ड में शामिल होंगे। प्रक्रिया को आसान बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।


इस बैठक में NBFC और MSME को पर्याप्त फंड मुहैया कराने पर भी बातचीत हुई। बैठक में यह फैसला किया गया कि जिस तरह रिटेल लोन बांटने के लिए बैंकों ने मिलकर लोन शामियाना मेला लगाया गया था। इसी तरह MSME को लोन देने के लिए भी मेला लगाया जाएगा।


NBFC के लोन को अगर बैंक खरीदते हैं तो सरकार 1 लाख करोड़ रुपए की गारंटी देगी। बैंकों की सलाह है कि NBFC की अच्छी क्वालिटी के लोन खरीदने के साथ ही कमजोर NBFC के अच्छी क्वालिटी के लोन भी खरीदे जा सकते हैं। इससे NBFC कंपनियों को फायदा होगा।


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