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Modi 2.0: क्या होंगी नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक चुनौतियां

प्रकाशित Fri, 24, 2019 पर 11:16  |  स्रोत : Moneycontrol.com

नरेंद्र मोदी सरकार को दूसरी बार सत्ता में आने का मौका मिला है। इस बार नरेंद्र मोदी को पिछली बार से भी ज्यादा बहुमत मिला है। इसका मतलब है कि मोदी सरकार पर लोगों का भरोसा बढ़ा है। पहले कार्यकाल के दौरान भी सरकार के सामने कई चुनौतियां थीं. लेकिन इस कार्यकाल की चुनौतियां ये हैं।


सुस्त अर्थव्यवस्था


भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ दिसंबर तिमाही में सबसे कम रही। दिसंबर 2018 तिमाही में अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट सिर्फ 6.6 फीसदी थी। सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (CSO) ने फिस्कल ईय़र 2018-19 की ग्रोथ रेट जनवरी के 7.2 फीसदी से घटाकर फरवरी में 7 फीसदी कर दिया था। नई सरकार का पहला मैक्रो डेटा 31 मई को आएगा। उस वक्त के GDP आंकड़ों में और कमी नजर आ सकती है। मुमकिन है कि GDP के आंकड़े घटकर 6.4 पर आ सकते हैं। हालांकि निवेश बढ़ने के कुछ संकेत हैं लेकिन सरकार को सबसे पहले बैड लोन की मुश्किल निपटाना होगाष ताकि बैंक निवेश बढ़ाने के लिए कर्ज दे सकें।


सुस्त कंजम्प्शन


सिर्फ निवेश में कमी ही सबसे बड़ी चिंता नहीं है। कंजम्प्शन में सुस्ती भी नई सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। अप्रैल में ऑटो कंपनियों की सेल्स 16 फीसदी तक गिर गई। पिछले पांच साल में डोमेस्टिक एयर ट्रैवल घटकर अप्रैल में पहली बार 4.5 फीसदी पर आ गया। सरकार फुल बजट जुलाई में लेकर आ सकती है। मुमकिन है कि तब डिमांड को बढ़ावा देने के लिए सरकार खर्च बढ़ा सकती है।


रोजगार


नई सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती रोजगार है। पहले चरण के कार्यकाल में रोजगार के मुद्दे पर सरकार की काफी आलोचना हुई है। कई सरकारी पद खाली हैं। ऐसे में सरकार को उन वेकेंसी को भरने के लिए कदम उठाने होंगे।


ट्रेड वॉर का असर


अमेरिका-चीन के ट्रेड वॉर से भारत के लिए चुनौतियां और मौके दोनों होंगे। भारत को ट्रेड वॉर से अपना मौका जल्द तलाशना होगा। अमेरिका ने कहा था कि इंडिया में नई सरकार बनने के बाद ही वह ड्यूटी फ्री बेनेफिट खत्म करने पर कोई फैसला लेगा।