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Godrej Interio ने किया सर्वे, भारत में तेजी से फैल रहा है 996 कल्चर

996 नंबर का मतलब ये है कि सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक हफ्ते 6 दिन तक काम करना।
अपडेटेड Oct 21, 2019 पर 11:03  |  स्रोत : Moneycontrol.com

आजकल के इस अर्थयुग में इंसान तेजी से मशीन का रूप धारण कर रहा है। वो अपने आपको 24 घंटे काम करने की मशीन बनाने के लिए आतुर है। अब तो बड़े शहरों में किसी के पास 1 मिनट का टाइम भी नहीं रहता। मल्टी नेशनल कंपनियों में काम करने वाले, IT सेक्टर के कर्मचारी या फिर स्टार्टअप शुरु करने वाले लोग इतने व्यस्त हैं कि वो कब चीन की बराबरी में पहुंच रहें, इसकी जरा भी भनक नहीं लग रही।


 दरअसल 996 वर्क कल्चर में हफ्ते के छह दिन 12 घंटे काम करना पड़ता है। चीन की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों और स्टार्टअप में यह वर्क कल्चर आम बात है। लिहाजा चीन में लोग 996 कल्चर के आदि होते जा रहे हैं। मतलब ये है कि लोग पैसे कमाने के लिए सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक हफ्ते के 6 दिन सिर्फ काम करते हैं।


इस पड़ोसी देश चीन का असर भारत में तेजी से वायरल फीवर की तरह फैल रहा है। अब भारत में भी मल्टी नेशनल कंपनियों में काम करने वाले लोग 996 के मकड़जाल में तेजी फंसते चले जा रहे हैं। हालांकि इनको कोई जबरन इस जाल में नहीं फंसा रहा, बल्कि वो अपने करियर, बेहतर लाइफस्टाइल के लिए ये सब कर रहे हैं।


हाल ही में Godrej Interio ने एक सर्वें करके इस में विस्तार पूर्वक एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, तीन में से एक भारतीय (34 फीसदी) प्रोफेशनल्स ने कहा है कि वो अपने बच्चों को ज्यादा समय नहीं दे पाते हैं। इसके अलावा परिवार, दोस्तों और अपने शौक पूरा करने का भी लोगों को समय नहीं मिलता है। इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अधिकतर भारतीयों ने अपने परिवार, दोस्तों और अपने शौक को पूरा करने के लिए समय नहीं मिलने की बात स्वीकार की है।


Godrej Interio के Chief Operating Officer (COO) अनिल माथुर ने बताया कि, इससे यह बात साफ होती है, कि तकनीक के आगमन से लोगों का समय काम में ज्यादा लगने लगा है। पहले जब तकनीक नहीं थी, तब लोग अपने परिवार के साथ ज्यादा समय व्यतीत करते थे।  


इकोनॉमिक टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, वर्क प्रेशर के चलते 64 फीसदी से अधिक लोगों ने माना कि वो अपने परिवार को पूरा टाइम नहीं दे पाते हैँ। जबकि 28 फीसदी लोगों का कहना है कि वो अपनी पत्नी को ज्यादा समय नहीं दे पाते। इसीतरह 21.2 फीसदी ने माना कि दोस्तों के साथ मिलने का समय नहीं बचता है। 16.2 फीसदी लोगों का कहना है कि वो अपने माता-पिता को ज्यादा वक्त नहीं दे पाते हैं। वहीं 61 फीसदी का कहना है कि वो अपने शौक पूरा करने के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं। 68.2 फीसदी लोगों ने माना कि वो अपनी शर्तों पर ज़िंदगी नहीं जी रहे हैं। इस सर्वे को गोदरेज ने देश के 13 शहरों चंडीगढ़, मुंबई, जयपुर, कोयंबटूर, पुणे, हैदराबाद, कोलकाता, दिल्ली और बंगलूरू में रहने वाले 1,300 लोगों के बीच किया था।


बता दें कि दुनिया के सबसे बड़े बिजनेसमैन की लिस्ट में शामिल चीन के सबसे बड़े ई-कॉर्मस कंपनी अलीबाबा के सीईओ जैक मा ने 996 यानी सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक हफ्ते में 6 दिन काम करने के वर्क कल्चर की वकालत की थी। जैक मा ने तो यहां तक कह दिया था कि टिपिकल 8 घंटे की शिफ्ट में काम करने वालों की अलीबाबा में कोई जगह नहीं है। हालांकि टेक इंडस्ट्री ने 996 काम करने के तरीके की आलोचना की थी। 
 
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