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AGR Dues Row: बकाए का कैलकुलेशन है गड़बड़, ऑडिटर्स की मदद ले सकती है सरकार

सरकार AGR बकाए के मामले को सुलझाने के लिए ऑडिटर्स हायर करने पर विचार कर रही है
अपडेटेड Feb 23, 2020 पर 10:49  |  स्रोत : Moneycontrol.com

टेलीकॉम सेक्टर के सबसे बड़े क्राइसिस में मदद के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठा सकती है। खबर है कि सरकार AGR (Adjusted Gross Revenue) के बकाया का मामला सुलझाने के लिए सरकार ऑडिटिंग फर्म्स की मदद ले सकती है। दरअसल, सरकार और टेलीकॉम कंपनियों के कैलकुलेशन में काफी अंतर सामने आया है, जिसके बाद सही आंकड़े सामने लाने के लिए सरकार ऑडिटर्स का सहारा ले सकती है, ताकि एक समझौते पर पहुंचा जा सके।


livemint की खबर के मुताबिक, सरकार AGR बकाए के मामले को सुलझाने के लिए ऑडिटर्स हायर करने पर विचार कर रही है।


सेल्फ असेसेंट नहीं हो रहा मैच


बता दें कि कुछ टेलीकॉम कंपनियों ने जो DoT को अपनी जो सेल्फ असेसमेंट की कॉपी सौंपी है, वो DoT के नंबरों से मैच नहीं हो रही है। Tata Tele ने 2,197 करोड़ रुपये की रकम चुकाई है। Tata Tele के मुताबिक उसकी अब कोई देनदारी नहीं बनती। DoT के मुताबिक Tata Tele की 14,382 करोड़ रुपयों की देनदारी है। सरकार Tata Tele के दावे को वेरीफाई कर रही है।


Vodafone-Idea का भी दावा है कि उसकी देनदारी 7,000 करोड़ है। कंपनियों के साथ कार्रवाई के लिए वक्त चाहिए। SC ने 17 मार्च तक आदेश का अनुपालन मांगा है।


 सुप्रीम कोर्ट ने 24 अक्टूबर को अपने एक फैसले में department of telecommunications (DoT) के AGR की परिभाषा को मान्य ठहराया था और टेलीकॉम कंपनियों को लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूज़ के चार्ज का बकाया चुकाने का आदेश दिया था। फिलहाल भारती एयरटेल ने 17 फरवरी को 10,000 करोड़ चुका दिए हैं, बाकी की रकम वो 17 मार्च से पहले चुका सकता है। वहीं, वोडाफोन-आइडिया ने भी 20 फरवरी तक 3500 करोड़ चुका दिए हैं।


किस कंपनी पर कितना है AGR बकाया?


लाइव मिंट में छपी खबर के मुताबिक, उपलब्ध अनुमानों के अनुसार एयरटेल का लाइसेंस शुल्क समेत तकरीबन 35,586 करोड़ रुपये बकाया है।


वोडाफोन आइडिया का 53,000 करोड़ रुपये बकाया है। जिसमें 24,729 करोड़ रुपये स्पेक्ट्रम का बकाया और अन्य 28,309 करोड़ रुपये लाइसेंस शुल्क है।


इसी तरह टाटा टेलीसर्विसेज का तकरीबन 13,800 करोड़ रुपये बकाया है। BSNL का 4,989 करोड़ रुपये और MTNL का 3,122 करोड़ रुपये AGR बकाया है।


कुल 1.47 लाख करोड़ रुपये में से तकरीबन 1.13 लाख करोड़ रुपये की वसूली होने की संभावना है, क्योंकि जो अन्य कंपनियों का AGR बकाया है वो पहले ही अपना बिजनेस (कारोबार) समेट चुकी हैं।


रिलायंस कम्युनिकेशन्स (Reliance Communications) और एयरसेल (Aircel) इस समय insolvency proceeding के दौर से गुजर रही हैं।


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