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अब 30 जनवरी तक एयर इंडिया की बोली लगाने वालों के नामों की हो सकती है घोषणा

केंद्र सरकार ने एयर इंडिया (Air India) को प्राइवेटाइज करने के लिए कई कंपनियों से बोलियां मंगवाई हैं
अपडेटेड Jan 16, 2021 पर 09:49  |  स्रोत : Moneycontrol.com

सरकारी एयरलाइंस कंपनी एयर इंडिया (Air India) के विनिवेश का दूसरा चरण 30 जनवरी, 2021 तक शुरू हो सकता है, जब बोली लगाने वालों के नामों की घोषणा की जाएगी। CNBC-TV18 ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। पहले इसकी तारीख पांच जनवरी तय थी। प्रक्रिया को दो चरणों में विभाजित किया जा सकता है। पहले चरण में, बोली लगाने वालों की ओर से एक्सप्रेशन ऑफ इंटेरेस्ट प्रस्तुत की गई हैं। अब पात्रता मानदंड और प्रारंभिक सूचना के आधार पर अन्य शर्तों के साथ इनका चयन किया जाएगा। नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि एयर इंडिया की बिक्री मार्च 2021 तक पूरी हो सकती है।


एयर इंडिया में अपनी 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने (Air India disinvestment) के लिए केंद्र सरकार लगातार कोशिश कर रही है, लेकिन इस डील पर ग्रहण के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहा है। अब उम्मीद की जा रही है कि साल 2021 में यह डील पूरी हो जाएगी। पहले सरकार एयरलाइन में आंशिक हिस्सेदारी बेचना चाहती थी, लेकिन बायर्स नहीं मिलने के कारण उसे पूरी हिस्सेदारी बेचने का फैसला करना पड़ा। मोदी कैबिनेट ने 27 जनवरी 2020 को 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने को लेकर फैसला किया था।


केंद्र सरकार ने एयर इंडिया (Air India) को प्राइवेटाइज करने के लिए कई कंपनियों से बोलियां मंगवाई हैं। Air India को खरीदने के लिए बोली लगाने वालों में टाटा ग्रुप के साथ अडाणी ग्रुप और हिंदूजा ब्रदर्स के अलावा Air India के कर्मचारियों को एक ग्रुप ने भी एक निजी अमेरिकी इक्विटी फंड Interups Inc के साथ मिलकर बोली लगाई है। टाटा ग्रुप (Tata Group) ने 69 हजार करोड़ रुपए से अधिक के कर्ज में फंसी सरकारी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया (Air India) को खरीदने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (expression of interest) सौंप दिया है।


एयर इंडिया पर 67 हजार करोड़ का कर्ज


सरकार ने इस एयर इंडिया में अपनी 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं। इसके साथ ही एयर इंडिया एक्सप्रेस लिमिटेड में भी एयर इंडिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी को बेचा जाएगा। एयर इंडिया एसएटीएस एयरपार्ट सविर्सिज प्रा लिमिटेड में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची जाएगी। मौजूदा वक्त एयर इंडिया पर 60,074 करोड़ रूपये का कर्ज है, लेकिन अधिग्रहण के बाद खरीदार को 23,286.5 करोड़ रुपये ही चुकाने होंगे। जबकि शेष कर्ज को विशेष उद्देश्य के लिए बनाए गए एयर इंडिया एसेट होल्डिंग्स लिमिटेड को ट्रांसफर कर दिया जाएगा, यानी बाकी का कर्ज खुद सरकार उठाएगी।


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