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GST के रेट पर चलेगी बिल्डर्स की मनमानी, जानिए क्यों?

अब अंडर कंस्ट्रक्शन अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट पर 1 फीसदी और बाकी पर 5 फीसदी GST चुकानी होगी। पहले ये दरें 8 फीसदी और 12 फीसदी थी
अपडेटेड May 09, 2019 पर 12:29  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अगर आपने कोई फ्लैट 31 मार्च 2019 को बुक कराया और आपके किसी दोस्त ने उसी बिल्डर से कोई फ्लैट 1 अप्रैल 2019 को बुक कराया तो आपकी डील महंगी होने का चांस बढ़ जाता है।


जी हां, अब यही होने वाला है। इतना ही नहीं, यह भी मुमकिन है कि 31 मार्च को आपके किसी दूसरे दोस्त ने फ्लैट बुक कराया हो, तो उसे भी आपसे कम कीमत चुकानी पड़े। लेकिन ऐसा क्यों है?


क्या है वजह?


इसकी वजह है टैक्स डिपार्टमेंट का नया फरमान है। 1 अप्रैल से GST की नई दरें लागू हो गई हैं। इसके मुताबिक, अंडर कंस्ट्रक्शन अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट पर 1 फीसदी और बाकी पर 5 फीसदी GST चुकानी होगी। पहले ये दरें 8 फीसदी और 12 फीसदी थी।


इसमें टैक्स डिपार्टमेंट ने बिल्डर को यह अधिकार दिया है कि वह दिए गए निर्देश के तहत वह ये बताए कि वह अपनी अंडर कंस्ट्रक्शन परियोजनाओं के लिए GST की नई दरें चाहता है या पुरानी। शुक्रवार 10 मई से पहले बिल्डर्स को यह बताना होगा। अगर बिल्डर्स 10 मई से पहले अपनी तरफ से नहीं बता पाते हैं तो सभी परियोजनाओं पर नई दरें लागू हो जाएंगी।  
 
नई परियोजनाओं पर कितना टैक्स लगेगा?


जो परियोजनाएं 1 अप्रैल के बाद शुरू हुई हैं उनके लिए GST रेट चुनने का विकल्प नहीं है। उनपर अपनेआप नई दरें लागू हो जाएंगी। इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर के मुताबिक डेवलपर्स को सावधानी से टैक्स स्कीम चुनने और उसे ग्राहकों को बताने की जरूरत है।


GST की नई-पूरानी दरों में से कोई एक चुनने का हक बिल्डर्स का है। एक्सपर्ट का कहना है कि एक ही सोसायटी के अलग-अलग फ्लैट के लिए अब ग्राहकों को GST की अलग-अलग दरें चुकानी पड़ सकती है। इसमें ग्राहकों की मजबूरी यह है कि पहले से बुक परियोजनाओं पर उन्हें यह पता नहीं होगा कि बिल्डर्स ने उसके लिए GST की नई दरें चुनी है या पुरानी। 


ग्राहकों को होगा ये फायदा


इस टैक्स रिजीम में ग्राहकों के लिए भी एक फायदा है। अगर आपने 1 अप्रैल 2019 से पहले कोई फ्लैट बुक कराया है। अगर आप उसे अब कैंसल करते हैं तो चुकाई गई GST रिफंड हो जाएगा।


हालांकि अगर कोई प्रोजेक्ट RERA के तहत रजिस्टर्ड है और उसके कंस्ट्रक्शन, बुकिंग और ऑक्यूपेंसी का रेट अलग-अलग है तो उन परियोजनाओं के लिए एख ही रेट तय होगी।