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1930 की महामंदी से भी भयावह है 2020 की मंदी: IMF चीफ

IMF की हेड क्रिस्टलीना जॉर्जिवा ने कहा कि इस मंदी का सबसे बुरा असर इमर्जिंग मार्केट और डेवलपिंग देशों पर होगा
अपडेटेड Apr 10, 2020 पर 15:44  |  स्रोत : Moneycontrol.com

IMF (International Monetary Fund) के मुताबिक, 2020 की मंदी 1930 की महामंदी के मुकाबले ज्यादा भयावह होगी। IMF की हेड क्रिस्टलीना जॉर्जिवा (Kristalina Georgieva) ने गुरुवार को कहा कि इस हालात से थोड़ी राहत 2021 में ही मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस महामारी के संक्रमण के कारण कुछ हफ्ते पहले से ही सामाजिक आर्थिक असर नजर आने लगे थे। इस महामारी से निपटने के लिए दुनिया भर की सरकारें पहले ही 8 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का पैकेज दे चुकी हैं। लेकिन अभी और फंड की जरूरत है।


उन्होंने कहा कि इस संकट का सबसे बुरा असर इमर्जिंग मार्केट और डेवलपिंग कंट्रीज पर पड़ेगा। इससे निपटने के लिए उन्हें सैकड़ों अरब डॉलर की जरूरत होगी।


IMF चीफ ने कहा, "सिर्फ तीन महीने पहले तक हम अपने 160 मेंबर देशों में प्रति व्यक्ति इनकम में इजाफे की उम्मीद कर रहे थे। अब 170 से अधिक देशों में प्रति व्यक्ति आय घटने का अनुमान है।"


जॉर्जिवा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अगले हफ्ते IMF और वर्ल्ड बैंक की बैठक होने वाली है।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया ऐसे संकट से जूझ रही है जो उसने पहले कभी नहीं देखा था। Covid-19 ने हमारी आर्थिक और सामाजिक स्थिति को काफी तेजी से खराब किया है। ऐसा हमने पहले कभी नहीं देखा था।


उन्होंने कहा कि इस वायरस से लोगों की जान जा रही है और इससे मुकाबले के लिए लॉकडाउन करना पड़ा है जिससे अरबों लोग प्रभावित हुए हैं। कुछ सप्ताह पहले सब सामान्य था। बच्चे स्कूल जा रहे थे, लोग काम पर जा रहे थे, हम परिवार और दोस्तों के साथ थे। लेकिन आज यह सब करने में जोखिम है।


जॉर्जिवा ने कहा कि दुनिया इस संकट की अवधि को लेकर असाधारण रूप से अनिश्चित है। लेकिन यह पहले ही साफ हो चुका है कि 2020 में वैश्विक वृद्धि दर में जोरदार गिरावट आएगी। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि हम महामंदी के बाद की सबसे बड़ी गिरावट देखेंगे।’’


महामंदी को दुनिया की अर्थव्यवस्था के सबसे बुरे दौर के रूप में जाना जाता है। इसकी शुरुआत 1929 में अमेरिका में वॉलस्ट्रीट पर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के धराशायी होने से हुई थी। महामंदी का दौर करीब दस साल चला था।


IMF प्रमुख ने कहा कि इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए आवश्यक पाबंदियां लगाई गई हैं, जिससे दुनिया की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंच रही है।


जॉर्जिवा ने कहा कि विशेषरूप से खुदरा, होटल, परिवहन और पर्यटन क्षेत्र इससे प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादातर देशों में अधिकांश श्रमिक या तो स्वरोजगार में लगे हैं या लघु एवं मझोले उपक्रमों में कार्यरत हैं। इस संकट से ऐसी कंपनियां और श्रमिक सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।


आईएमएफ प्रमुख ने कहा कि अफ्रीका, लातिनी अमेरिका और एशिया के एक बड़े हिस्से के उभरते बाजार और कम आय वाले देशों में जोखिम काफी अधिक है। सबसे पहले उनकी स्वास्थ्य प्रणाली काफी कमजोर है। इसके अलावा उन्हें घनी आबादी वाले शहरों और मलिन बस्तियों में इस चुनौती से जूझना है जहां शारिक रूप से सुरक्षित दूरी बना कर रहने का विकल्प ही नहीं है।


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