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IMF ने FY-2021 के लिए भारत की ग्रोथ रेट 1.20% घटाकर 5.8% किया

IMF की चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ (Gita Gopinath) ने कहा, NBFC में कमजोरी और गांवों में आमदनी घटने से ग्रोथ घटी है
अपडेटेड Jan 21, 2020 पर 16:59  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) ने सोमवार को भारत और ग्लोबल ग्रोथ के अपने अनुमान को कम किया है। अनुमान से ज्यादा तेज स्लोडाउन की वजह से IMF को ग्रोथ का अनुमान घटाना पड़ा। IMF के मुताबिक, ग्लोबल ग्रोथ 2020 में 3.3 फीसदी रह सकती है। जबकि 2019 में 2.9 फीसदी रहने का अनुमान है। यह पिछले एक दशक में सबसे कमजोर ग्रोथ है। 


विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) के सालाना शिखर सम्मेलन के उद्घाटन से पहले ताजा ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक पर जानकारी देते हुए IMF ने भारत के आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 2019 के लिए कम कर 4.8 प्रतिशत किया है।


क्या है ताजा अनुमान?


फिस्कल ईय़र 2019 में ग्लोबल ग्रोथ रेट 2.9 फीसदी रहेगी। 2020 में इसमें थोड़ा सुधार आएगा और यह 3.3 फीसदी रह सकती है। 2021 में ग्लोबल ग्रोथ 3.4 फीसदी रहने का अनुमान है। इससे पहले IMF ने पिछले साल अक्टूबर में ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान जारी किया था। उसके मुकाबले 2019 और 2020 के उसके ताजा अनुमान में 0.1 फीसदी कमी आई है। जबकि 2021 के ग्रोथ रेट के अनुमान में 0.2 प्रतिशत अंक की कमी आई है।


IMF ने कहा, ‘‘आर्थिक वृद्धि के अनुमान में जो कमी की गयी है, वह कुछ उभरते बाजारों में खासकर भारत में आर्थिक गतिविधियों को लेकर हैरान करने वाली नकारात्मक बातें हैं। इसके कारण अगले दो साल के लिए ग्रोथ की संभावनाओं का फिर से आकलन किया गया। कुछ मामलों में यह आकलन सामाजिक असंतोष के प्रभाव को भी दर्शाता है।’’


भारत में जन्मीं IMF की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा कि मुख्य रूप से गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र (NBFC) में नरमी तथा ग्रामीण क्षेत्र की आय में कमजोर वृद्धि के कारण भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान कम हुआ है।


मुद्राकोष के अनुसार 2019-20 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 4.8 फीसदी रहेगी। IMF के अनुसार मौद्रिक और राजकोषीय प्रोत्साहनों के साथ-साथ तेल के दाम में नरमी से 2020 और 2021 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर सुधरकर क्रमश: 5.8 प्रतिशत और 6.5 प्रतिशत रहेगी। हालांकि मुद्राकोष के अक्टूबर में जारी ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक के पूर्व अनुमान के मुकाबले यह आंकड़ा क्रमश: 1.2 प्रतिशत और 0.9 प्रतिशत कम है।


गोपीनाथ ने यह भी कहा कि 2020 में ग्लोबल ग्रोथ को लेकर फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है। यह अर्जेंटीना, ईरान और तुर्की जैसी दबाव वाली अर्थव्यवस्थाओं के ग्रोथ और ब्राजील, भारत और मेक्सिको जैसी उभरती और क्षमता से कम प्रदर्शन कर रही विकासशील देशों की स्थिति पर निर्भर है।


उल्लेखनीय है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर जुलाई-सितंबर 2019 तिमाही में 4.5 फीसदी रही। यह छह साल में सबसे कम रही है। इसकी वजह मैन्युफैक्चरिंग और उपभोक्ता मांग में नरमी के साथ निजी निवेश कमजोर रहना है।


क्या है सकारात्मक पहलू?


IMF ने कहा, मैन्युफैक्चरिंग में सुधार के अस्थायी संकेत तथा ग्लोबल ट्रेड में सुधार से बाजार में मजबूती आई है। इसके अलावा मौद्रिक नीतियों का नरम रुख, अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता को लेकर सकारात्मक खबरें और ब्रेक्जिट समझौते के आगे बढ़ने से जोखिम कम हुआ है।


IMF के अनुसार चीन की वृद्धि दर फिस्कल ईय़र 2019 में 6.1 फीसदी, फिस्कल ईयर 2020 में 6.0 फीसदी ह सकती है। हालांकि, अमेरिका-चीन आर्थिक संबंधों को लेकर मसला बना रहने का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।


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