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सरकार पर कर्ज ज्यादा है इसलिए खर्च कम करे भारत: IMF

मौजूदा फिस्कल ईयर में IMF ने ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 4.8 फीसदी कर दिया है। पिछले साल जनवरी में IMF ने यह 7.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया था
अपडेटेड Feb 14, 2020 पर 16:23  |  स्रोत : Moneycontrol.com

इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने कहा है कि हालिया बजट में भारत ने फिस्कल सिचुएशन पर "अकोमडेटिव" रुख बरकरार रखना सही है क्योंकि भारत की इकोनॉमी कमजोर है। IMF चाहता है कि भारत सरकार मीडियम टर्म में फिस्कल कंसॉलिडेशन करे ताकि कर्ज के बोझ को कम किया जा सके। यहां फिस्कल कंसॉलिडेशन के मायने खर्च कम करने से है।


IMF ने भारत की इकोनॉमी को लेकर पहले जो अनुमान जताया था, भारत की इकोनॉमी अभी उससे कमजोर है। गुरुवार को वॉशिंगटन में आयोजित एक समारोह में IMF के कम्युनिकेशंस डायरेक्टर गेरी राइस ने कहा, "कमजोर इकोनॉमी को देखते हुए बजट में अकोमडेटिव रुख अख्तियार करना सही फैसला है।"


हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बजट में कई सोशल स्कीमों पर खर्च किया जा रहा है। लिहाजा मीडियम टर्म में फिस्कल कंसॉलिडेशन के साथ स्ट्रक्चरल और फाइनेंशियल सेक्टर के रिफॉर्म की भी जरूरत है। सरकार के कर्ज का स्तर बढ़ने की वजह से कंसॉलिडेशन स्ट्रैटेजी को फॉलो करना जरूरी है।


मौजूदा फिस्कल ईयर में IMF ने ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 4.8 फीसदी कर दिया है। पिछले साल जनवरी में IMF ने यह 7.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।


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