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H-1B Visa के कड़े नियमों का खामियाजा भुगत रहीं इंडियन IT कंपनीज़, सबसे ज्यादा रिजेक्ट हुए पीटिशन

इस वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में इंडियन कंपनियों के H-1B पेटीशंस को खारिज करने की दर 24% पर पहुंच गई है
अपडेटेड Nov 06, 2019 पर 14:16  |  स्रोत : Moneycontrol.com

H-1B Visa पर ट्रंप प्रशासन की ओर से कड़े किए गए नियमों से सबसे ज्यादा प्रभावित भारतीय टेक कंपनियां हुई हैं। एक रिपोर्ट में सामने आया है कि इस वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में इंडियन कंपनियों के H-1B पीटिशंस को खारिज करने की दर 24 प्रतिशत पर पहुंच गई है। 2015 में यह दर छह फीसदी था।


अमेरिकन थिंक टैंक  National Foundation for American Policy ने US Citizenship and Immigration Services (USCIS) की ओर से हासिल किए गए डेटा पर एक स्टडी की है, जिसमें सामने आया है कि इससे भारत की बड़ी आईटी कंपनियां ही इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जिससें इन आरोपों को बल मिलता है कि इस कानून के तहत भारतीय कंपनियों को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है।


अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो 2015 में Amazon, Microsoft, Intel और Google जैसी अमेरिकन कंपनियों के लिए H-1B पीटिशन का डिनायल रेट महज एक फीसदी था, जो अब बढ़कर क्रमश: 6,8,7 और 3 फीसदी हो गया है। वहीं Apple लिए डिनायल रेट दो फीसदी के दर पर बना हुआ है।


वहीं भारतीय आईटी कंपनियों के डिनायल रेट पर देखें तो इसमें बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है। Tech Mahindra का डिनायल रेट 4 फीसदी से 41 फीसदी, Tata Consultancy Services का 6 से 34 फीसदी, Wipro का 7 से 53 फीसदी और Infosys का 2 से 45 फीसदी रहा है।


रिपोर्ट के मुताबिक, Accenture, Capgemini जैसी कई ऐसी इंडियन आईटी कंपनीज, जो अमेरिकी कंपनियों को प्रोफेशनल और आईटी सर्विस प्रोवाइड कराती हैं, इस वित्त वर्ष के तीनों तिमाही में उनके पीटिशन का डिनायल रेट भी 30 फीसदी से ज्यादा ऊपर है।




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