Moneycontrol » समाचार » ख़बरें

सुस्ती का एक और इशारा! देश में फ्यूल डिमांड दो साल में सबसे कम

PPAC के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का उपभोग गिरकर 1.601 करोड़ टन पर आ गया है। यह जुलाई 2017 के 1.606 से कम है।
अपडेटेड Oct 17, 2019 पर 08:29  |  स्रोत : Moneycontrol.com

माना जाता है कि किसी देश की अर्थव्यवस्था की स्पीड का अंदाजा फ्यूल की डिमांड से लगाया जा सकता है। अगर इश पैमाने पर देखें तो समझ आएगा कि देश में आर्थिक सुस्ती पैर पसार रही है। सितंबर 2019 में फ्यूल डिमांड घटकर दो साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। इस दौरान पेट्रोल और LPG कंजम्पशन की डिमांड में तेजी आई है। लेकिन डीजल की डिमांज कमी ने इसके असर को खत्म कर दिया है। 


Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का उपभोग गिरकर 1.601 करोड़ टन पर आ गया है। यह जुलाई 2017 के 1.606 से कम है।


देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला फ्यूल डीजल है। इसका इस्तेमार 3.2 फीसदी घटकर 58 लाख टन रह गया है। रोड कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल होने वाले Bitumen का कंजम्पशन भी 7.3 फीसदी गिरकर 3,43,000 टन रह गया है। सितंबर में फ्यूल ऑयल की सेल्स 3.8 फीसदी घटकर 5,25,000 टन रह गई है। इस गिरावट ने LPG और पेट्रोल की डिमांड में तेजी के असर को कम कर दिया है।


पेट्रोल की सेल 6.2 फीसदी बढ़कर 23.7 लाख टन रही। लेकिन जेट फ्यूल या ATF की सेल्स 1.6 फीसदी घटकर 6,66,000 टन रह गई है। इस दौरान LPG कंजम्पशन भी 6 फीसदी बढ़कर 21.8 लाख टन रह गया है। केरोसिन की डिमांड करीब 38 फीसदी गिरकर 1,76,000 टन रह गई है।  


सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।