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फ्लाइट में कोरोनावायरस संक्रमण का खतरा कम है, जानिए क्या है राज़

WHO ने पहले बताया था कि कोरोनावायरस संक्रमण ड्रॉपलेट्स की वजह से फैलता है
अपडेटेड May 26, 2020 पर 15:31  |  स्रोत : Moneycontrol.com

देश में करीब ठीक दो महीने बाद 25 मई से डोमेस्टिक फ्लाइट शुरू हुई। अभी लॉकडाउन का चौथा चरण चल रहा है उसके बावजूद कोरोनावायरस के केस बढ़कर 1.40 लाख के करीब पहुंच गए है। ऐसे में सवाल यह है कि एयरपोर्ट पर जब हजारों लोगों की भीड़ जुट रही है तो क्या कोरोनावायरस का संक्रमण एयरपोर्ट पर नहीं बढ़ेगा। क्या प्लेन से ट्रैवल करना फिलहाल ज्यादा खतरनाक नहीं है।


हालांकि इस मामले में कुछ रिपोर्ट्स का कहना है कि प्लेन से ट्रैवल करना कम खतरनाक है। इसमें खतरा तभी है जब किसी स्वस्थ यात्री के बगल में कोई संक्रमित शख्स बैठता है।


WHO ने पहले बताया था कि कोरोनावायरस संक्रमण ड्रॉपलेट्स की वजह से फैलता है। किसी संक्रमित शख्स के ड्रॉपलेट्स अगर किसी स्वस्थ व्यक्ति के संपर्क में आता है तो वह शख्स भी संक्रमित हो जाता है।


किसी जगह पर जब वेंटिलेशन ठीक से काम नहीं करता है तो वहां पर संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा रहता है। प्लेन में वेंटिलेशन का इंतजाम अच्छा रहता है। वहां हर घंटे में 20-30 बार कुल हवा बदली जाती है। बोइंग और एयरबस जैसी कंपनियों के प्लेन वेंटिलेशन सिस्टम के मामले में ज्यादा सुरक्षित हैं।


2018 में जॉर्जिया टेक और एमोरी यूनवर्सिटी के रिसर्चर की एक स्टडी के मुताबिक, प्लेन में वायरस का संक्रमण हो सकता है लेकिन छोटे स्तर पर।  रिसर्चर ने जिस सैंपल की स्टडी की उसके मुताबिक, किसी संक्रमित के आसपास की 11 सीट तक ही वायरस का संक्रमण फैल सकता है। इस दायरे के बाद संक्रमण फैलने का चांस सिर्फ 3 फीसदी रहता है।


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