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जानिए क्या Hydroxychloriquine दवा, क्यों मांग रहे हैं दुनिया के कई देश

Hydroxychloriquine दवा का इस्तेमाल मलेरिया के उपचार में किया जाता है, लेकिन कोरोना वायरस की कोई दवा न होने का कारण इसका उपयोग हो रहा है
अपडेटेड Apr 13, 2020 पर 11:40  |  स्रोत : Moneycontrol.com

चीन से निकले कोरोना वायरस के संक्रमण ने पूरी दुनिया को घुटनों के बल खड़ा कर दिया है। विकसित देश जहां कहते हैं किसी भी असाध्य रोग के उपचार का तगड़ा बंदोबस्त होता है। वो भी कोरोना वायरस के उपचार पर हांफते नजर आ रहे हैं। भारत भी कोरोना वायरस के संक्रमण में फंसता चला जा रहा है। लेकिन भारत के पास इसके उपचार के लिए एक ऐसी दवा है, जिसे दुनिया के कई देश मांग रहे हैं। वो कोई और दवा नहीं बल्कि Hydroxychloriquine (हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वाइन) है। इस दवा का उपयोग करोना वायरस संक्रमित मरीज में करने पर बेहतर रिजल्ट्स आ रहे हैं।


क्या है Hydroxychloriquine (हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वाइन) 


यह एक एंटी मलेरिया दवा है, जो कई तरह के मलेरिया से लड़ने में सक्षम है। ये मलेरिया की काफी पुरानी दवा है। यह दवा ऑटोइम्यून डिसीसेज जैसे rheumatoid आर्थराइटिस और lupus के इलाज में भी इस्तेमाल होती है। एक रिसर्च में सामने आया है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा कोरोना वायरस से लड़ने में मददगार है। लेकिन यह अकेले कोरोना को ठीक करने में कारगर नहीं है। इसे अन्य दवाओं के साथ मिलाकर इसके बहुत अच्छे रिजल्ट्स सामने आए हैं। इस बात को अमेरिकी डॉक्टर्स भी मानते हैं।


भारत में क्यों बनती है


भारत में लाखों लोगों को मलेरिया हो जाता है। जिसके उपचार के लिए दवाइयों की आवश्यकता होती है। मलेरिया के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा बेहतर मानी जाती है। इसलिए इसका निर्माण भारत में अधिक किया जाता है। इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (Indian Pharmaceutical Alliance-IPA) का कहना है कि पूरी दुनिया के जरूरत के मुताबिक भारत में 70 फीसदी दवा बनाई जाती है। देश में हर महीने 40 टन निर्माण करने की क्षमता है। इस क्षमता को और अधिक बढ़ाया जा सकता है। हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा का भारत सबसे ज्यादा निर्यात करता है।  


ये कंपनियां बनाती हैं दवा


भारत में इस दवा का निर्माण IPCA लैबोरेटरीज, Zydus Cadila (जाइडस कैडिला) और Wallace फार्मास्युटिकल्स करती हैं। हाल ही में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने करीब 10 करोड़ एचसीक्यू टैबलेट का ऑर्डर IPCA लैबोरेटरीज और जाइडस कैडिला (Zydus Cadila) को दिया है।


अमेरिका में क्यों नहीं मिलती दवा 


दुनिया के विकसित देशों में मलेरिया जैसे रोग बहुत कम लोगों को होता है। इसलिए वहां इस दवा के रिसर्च और निर्माण में कोई काम नहीं किया गया।


चीन ने माना Hydroxychloriquine दवा से होता है फायदा  


चीन की एक रिसर्च रिपोर्ट में सामने आया है कि उसने भी अपने यहां कोरोना संक्रमित मरीजों को Hydroxychloroquine दवा दी। जिसमें बीमारी का स्तर अलग-अलग था। लेकिन कई मरीजों की खांसी, बुखार इस दवा से ठीक हो गई। मतलब चीन ने पुष्टि कर दी है कि यह दवा कारगर है।


दुनिया में Hydroxychloroquine की बढ़ी मांग


एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 20 देशों ने भारत से Hydroxychloroquine दवा लेने का ऑर्डर दिया है। भारत ने भी मानवीय आधार पर इस दवा को देने का फैसला किया है। भारत का कहना है कि जिस देश ने पहले ऑर्डर दिया, उसी आधार पर Hydroxychloroquine की खेप पहुंचा दी जाएगी।


कुल मिलाकर Hydroxychloroquine दवा भारत में भले ही बहुत से बनती रही हो और इसका उपयोग भी होता रहा हो, लेकिन कोरोना वायरस के इस संक्रमण काल में Hydroxychloroquine दवा पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोर रही है। दुनिया के कई दिग्गज देश Hydroxychloroquine दवा के लिए भारत से गुहार लगा रहे हैं। ब्राजील ने तो Hydroxychloroquine दवा की तुलना संजीवनी से कर दी है।


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