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लॉटरी इंडस्ट्री ने प्राइज मनी से टैक्स हटाने की मांग की

मौजूदा समय में राज्य के भीतर लॉटरी बेचने पर 12 फीसदी और और राज्य के बाहर 28 फीसदी GST रेट है
अपडेटेड Sep 05, 2019 पर 18:59  |  स्रोत : Moneycontrol.com

लॉटरी इंडस्ट्री ने सरकार से GST रेट एक समान 12 फीसदी और प्राइज मनी पर टैक्स हटाए जाने की मांग की है। दोहरे टैक्स की मार से लॉटरी उद्योग में वृद्धि नहीं हो पा रही है। बता दें कि मौजूदा समय में राज्य के भीतर लॉटरी बेचने पर 12 फीसदी और और राज्य के बाहर 28 फीसदी GST रेट है।


राज्यों के बीच बढ़ते इस मतभेद को दूर करने के लिए इससे पहले GST काउंसिल ने महाराष्ट्र के फाइनेंस मिनिस्टर सुधीर मुनगंटीवर की अध्यक्षता में 8 सदस्यों के मंत्री समूह का गठन किया है। काउंसिल ने भी जुलाई में इस मसले पर अटार्नी जनरल से कानूनी सलाह मांगी थी।


ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ लॉटरी ट्रेड एंड एलाइड इंडस्ट्रीज ने फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण से कहा कि GST  काउंसिल को लॉटरी टिकट पर लिखी प्राइज मनी को हटाकर GST लगाने पर विचार करना चाहिए। क्योंकि इस राशि को कंपनी लॉटरी जीतने वाले को दे देती है। इसलिए लॉटरी ट्रेड कभी भी उसकी इनकम का हिस्सा नहीं होती।     


एसोसिएशन के वाइस प्रेसीडेंट कमलेश विजय ने कहा कि, प्राइज मनी को अडजस्ट करने के बाद लॉटरी पर पक्षपाती (Discriminatory) टैक्स के रेट खत्म को खत्म कर देना चाहिए। साथ ही इस पर 12 फीसदी का एक समान GST लगाया जाना चाहिए।


बता दें कि मौजूदा समय में राज्यों द्वारा चलाई जाने वाली सभी लॉटरियों का नियमन लॉटरी रेगुलेशन एक्ट 1998 के प्रावधानों के अनुसार होता है। 


Sugal & Damani के ग्रुप CEO विजय ने कहा कि 1 जुलाई 2017 से GST लागू होने से पहले लॉटरी पर 6 फीसदी टैक्स लगाया जाता था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मौजूदा समय में महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, पंजाब, और अरुणाचल प्रदेश समेत तकरीबन 10 राज्यों में लॉटरी की मंजूरी मिली हुई है। देश में 1969 से लॉटरी संचालित हो रही है।


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